पटना, 30 नवम्बर (पटना डेस्क) 18वीं बिहार विधानसभा में विपक्ष की कमान अब एक बार फिर तेजस्वी यादव के हाथों में होगी। शनिवार को उनके सरकारी आवास पोलो रोड पर हुई महागठबंधन विधायक दल की बैठक में सर्वसम्मति से उन्हें नेता प्रतिपक्ष चुना गया। आरजेडी, कांग्रेस और वाम दलों के विधायकों ने कहा कि संख्या भले ही कम है, लेकिन जनता से जुड़े मुद्दों पर सदन में उनकी आवाज और बुलंद होगी।

बिहार विधानसभा चुनाव के बाद 1 से 5 दिसंबर तक चलने वाले विशेष सत्र के लिए विपक्ष ने अपनी रणनीति तय कर ली है। सदन में विपक्षी विधायकों की संख्या 35 है—आरजेडी के 25, कांग्रेस के 6 और वाम दलों के 4 विधायक। महागठबंधन ने साफ कहा कि अल्प संख्या उन्हें रोक नहीं पाएगी; सरकार की हर गलत नीति का कड़ा और रचनात्मक विरोध किया जाएगा। माले विधायक अजय कुमार ने दावा किया कि विपक्ष सड़क से सदन तक एकजुट होकर जनता के मुद्दों पर संघर्ष करेगा। वहीं आरजेडी के भाई वीरेंद्र ने कहा कि “संख्या कम है, पर मनोबल किसी कीमत पर कम नहीं होगा।”
महागठबंधन की बैठक से पहले तेजस्वी यादव ने दिल्ली से लौटते ही पार्टी विधायकों से अलग बैठक कर विस्तृत फीडबैक लिया। सूत्र बताते हैं कि समीक्षा बैठक बेहद महत्वपूर्ण रही, क्योंकि पार्टी पिछले कई दिनों से चुनावी हार के कारणों का विश्लेषण कर रही है। तीन प्रमंडलों की समीक्षा में लगभग 300 से अधिक हार के कारण सामने आए हैं। माना जा रहा है कि तेजस्वी इन फीडबैक के आधार पर विजयी विधायकों से भी व्यक्तिगत रूप से बात कर सकते हैं।
















