नई दिल्ली, 30 नवम्बर (अशोक”अश्क”) यूके और कनाडा में पिछले कुछ हफ्तों से एक नए फ्लू वेरिएंट ने हड़कंप मचा रखा है। सबक्लेड K नाम का यह स्ट्रेन दरअसल H3N2 इंफ्लूएंजा वायरस का म्यूटेटेड रूप है। इसकी चर्चा अब पूरी दुनिया में है, क्योंकि इसके मामले अमेरिका और जापान तक पहुंच चुके हैं। वैज्ञानिकों के मुताबिक सबक्लेड K में करीब 7 प्रमुख म्यूटेशन पाए गए हैं, जो इसे हमारे इम्यून सिस्टम और मौजूदा फ्लू वैक्सीन दोनों से बच निकलने में मदद करते हैं।

कोरोना पाबंदियाँ हटने के बाद बढ़े वैश्विक ट्रैवल ने इस नए फ्लू की रफ्तार और तेज कर दी है। रिपोर्ट्स के अनुसार, यह वेरिएंट पिछले सीजन के H3N2 वायरस की तुलना में अधिक संक्रामक है और कई देशों में तेजी से फैल रहा है।
सबक्लेड K के लक्षण भले ही सामान्य फ्लू जैसे हों, लेकिन कई मरीजों में ये लक्षण ज्यादा तीव्र और अधिक अवधि तक बने रहते हैं। तेज बुखार, खांसी, गले में दर्द, सिरदर्द, थकान, मांसपेशियों में दर्द, नाक बहना या बंद होना सबसे आम हैं। कुछ मरीजों में उल्टी, दस्त और सीने में जकड़न भी देखी गई है।
बुजुर्ग, बच्चे, गर्भवती महिलाएं और कमजोर इम्यूनिटी वाले लोग इसक चपेट में जल्दी आते हैं।
सबक्लेड K का उपचार सामान्य एंटीवायरल दवाओं से किया जाता है। डॉक्टर लक्षणों के अनुसार बुखार और खांसी की दवा देने की सलाह देते हैं। हाइड्रेशन, आराम और पौष्टिक भोजन से ज्यादातर मरीज कुछ दिनों में ठीक हो जाते हैं। गंभीर लक्षणों पर तुरंत डॉक्टर से संपर्क जरूरी है।
भारत में अभी तक इसका कोई मामला सामने नहीं आया है, लेकिन सतर्कता बेहद महत्वपूर्ण है।
हर साल फ्लू वैक्सीन लगवाना, भीड़ वाली जगहों में मास्क पहनना, हाथ धोना, बीमार व्यक्ति से दूरी रखना और शुरुआती लक्षण दिखते ही डॉक्टर की सलाह लेना सबसे प्रभावी उपाय हैं।

