नई दिल्ली, 30 नवम्बर (अशोक “अश्क”) सुप्रीम कोर्ट ने ऐसा आदेश दिया है जिसने महाराष्ट्र की पूरी सियासत को हिला दिया है। अदालत ने साफ चेताया—निकाय चुनाव अपनी तारीख पर होंगे, पर नतीजे अंतिम नहीं होंगे। यानी जिसने जीत का जश्न मनाया, वह कल हार की फाइल में भी दर्ज हो सकता है। कोर्ट का यह फैसला राजनीतिक दलों के लिए सीधी चेतावनी है कि अब खेल उतना आसान नहीं “भूल महंगी पड़ेगी।”

मामला ओबीसी आरक्षण बढ़ाने के आरोपों से जुड़ा है। कहा गया कि महाराष्ट्र सरकार ने आरक्षण की तय सीमा का उल्लंघन किया है। मुख्य न्यायाधीश जस्टिस सूर्यकांत और जस्टिस जयमाल्या बागची की बेंच ने यह मामला तीन-न्यायाधीशों की बड़ी पीठ को भेजते हुए 21 जनवरी 2026 को सुनवाई तय की है।
जहां आरक्षण 50% से अधिक है, वहां चुनाव तो 2 दिसंबर को होंगे, लेकिन नतीजे कोर्ट के अंतिम फैसले पर निर्भर करेंगे। मतलब आज जो विजेता बनेगा, वह कल “अस्थायी मेहमान” साबित हो सकता है। राजनीतिक हलकों में दहशत है लोकतंत्र मजबूत होगा या अस्थिर, ये सवाल हवा में तैर रहा है।
राज्य निर्वाचन आयोग के अनुसार 246 नगर परिषद और 42 नगर पंचायतों में चुनाव प्रक्रिया शुरू हो चुकी है। इनमें से 40 नगर परिषद और 17 नगर पंचायतों में आरक्षण 50% से ज्यादा है। वहीं 29 नगर परिषदों, 32 जिला पंचायतों और 346 पंचायत समितियों के चुनाव अभी नोटिफाई होने बाकी हैं
सुप्रीम कोर्ट का आदेश साफ है “अस्थायी चुनाव चलेगा, पर असली फैसला आरक्षण पर निर्भर।”
अब राजनीतिक गलियारों में एक ही चर्चा—इस बार जीत असली होगी या सिर्फ प्रोविजनल?

