
समस्तीपुर, 1 दिसंबर (मोहम्मद जमशेद) समस्तीपुर में थाना क्षेत्र की अस्पष्ट सीमाओं ने आम लोगों की जिंदगी को मुश्किलों के भंवर में धकेल दिया है। शहर में अपराध हो या विवाद पीड़ित को पहले इंसाफ नहीं, बल्कि थानों की परिक्रमा करनी पड़ती है। नगर थाना कहता है मामला मुफस्सिल का है, और मुफस्सिल थाना इसे नगर थाना का मुद्दा बता देता है। नतीजा पीड़ित घंटों, कभी-कभी दिनों तक न्याय से वंचित रह जाता है।
भूमि-विवाद, हत्या, चोरी, छिनतई, लूट, दंगा, पासपोर्ट वेरिफिकेशन, आचरण प्रमाणपत्र, अतिक्रमण जैसे तात्कालिक मामलों में यह खींचातानी पुलिस कार्रवाई को लगभग असंभव बना देती है। सीमा विवाद के कारण आपसी बहस, तनाव और कभी-कभी झगड़े की नौबत तक आ जाती है।
विवेक विहार की नीलम देवी हाल ही में चैन छिनतई की शिकायत लेकर पहुंचीं तो उन्हें घंटों नगर और मुफस्सिल थाना के बीच दौड़ाया गया। मगरदही के जेनरेटर संचालक दीनबंधु प्रसाद को शाम 4 बजे से रात 9 बजे तक दोनों थानों के बीच चक्कर काटने पड़े। धर्मपुर के न्यू कॉलोनी में जमीन विवाद के मामले में भी पीड़ित को दोपहर से देर रात 10 बजे तक यही थाना-परिक्रमा झेलनी पड़ी।
यह समस्या नई नहीं है। चांदना पेट्रोल पंप के पास हादसे में मारे गए किसान सलाहकार हों या विवेक विहार के गोलीकांड पीड़ित अजय पंडित सभी को थाना सीमा विवाद की वजह से भारी परेशानी का सामना करना पड़ा।
इस गंभीर जनसमस्या पर भाकपा (माले) जिला स्थायी समिति सदस्य एवं आंदोलनकारी सुरेंद्र प्रसाद सिंह ने कहा कि थाने का सीमांकन स्पष्ट होना चाहिए। थाने का क्षेत्र वह दायरा तय करता है जहां अपराध दर्ज किया जाता है, लेकिन पुराने और अस्पष्ट सीमांकन ने व्यवस्था को अपंग बना दिया है।
उन्होंने मांग की कि “सड़क, गली, मोहल्ले हर जगह स्पष्ट सीमा-निर्धारण बोर्ड लगाए जाएं, ताकि पीड़ित को थानों के चक्कर में न घसीटा जाए और त्वरित न्याय मिल सके।”
समस्तीपुर में बढ़ रही इस परेशानी ने पुलिस प्रशासन की कार्यशैली पर बड़े सवाल खड़े कर दिए हैं क्या जनता इंसाफ पाने की बजाय थानों की दौड़ ही लगाती रहेगी?

