पटना, 11 दिसम्बर (पटना डेस्क) बिहार विधानसभा चुनाव 2025 के नतीजों के बाद सबसे ज्यादा सुर्खियाँ बटोरी हैं असदुद्दीन ओवैसी की पार्टी AIMIM ने। सीमांचल की पाँच सीटें जीतकर पार्टी ने अपनी पकड़ दोबारा दिखा दी है, मगर इसी के साथ राजनीतिक गलियारों में फुसफुसाहट तेज हो गई।

क्या इस बार भी 2020 जैसा खेला दोहराया जाएगा? क्या AIMIM के विधायक फिर किसी और खेमे में जा सकते हैं? अटकलों को हवा तब मिली, जब तीन दिन पहले AIMIM के तीन विधायक सरवर आलम, मुर्शीद आलम और प्रदेश अध्यक्ष अख्तरुल ईमान, मुख्यमंत्री नीतीश कुमार और डिप्टी सीएम सम्राट चौधरी से मुलाकात करने पहुँचे। जोकीहाट के विधायक मुर्शीद आलम ने तो नीतीश कुमार को “राजनीतिक गुरु” तक बता दिया, जिसके बाद सियासी पारे में उबाल आ गया।लेकिन अख्तरुल ईमान ने सभी कयासों पर ब्रेक लगाते हुए कहा कि मुलाकात पूरी तरह विकास और क्षेत्रीय समस्याओं को लेकर थी, किसी राजनीतिक सौदेबाजी से इसका कोई लेना-देना नहीं। उन्होंने साफ कहा—“विपक्ष के लोग मुख्यमंत्री या मंत्री से नहीं मिलेंगे, तो आखिर किससे मिलेंगे?”

