नई दिल्ली, 12 दिसम्बर (अशोक “अश्क”) नई दिल्ली में गुरुवार को सुप्रीम कोर्ट की कार्यवाही उस समय बेहद तीखी होती दिखी, जब भारत के मुख्य न्यायाधीश (CJI) सूर्यकांत ने लंबित मामलों को लेकर सोशल मीडिया पर हो रही टिप्पणियों पर गहरी चिंता जताई। उन्होंने साफ कहा कि ऑनलाइन ट्रोलिंग या दवाब बनाने की कोशिशों से न्यायपालिका को कोई फर्क नहीं पड़ता, और न ही उन्हें कोई डरा सकता है। CJI पूर्व सांसद प्रज्वल रेवन्ना की उस याचिका पर सुनवाई कर रहे थे, जिसमें उन्होंने अपने खिलाफ चल रहे रेप केस के ट्रायल को दूसरी अदालत में ट्रांसफर करने की मांग की थी। हालांकि सुप्रीम कोर्ट ने इसे खारिज कर दिया।

CJI सूर्यकांत ने कहा, “सोशल मीडिया पर चाहे जो लिखा जाए… मैं बिल्कुल प्रभावित नहीं होता। अगर किसी को लगता है कि वह मुझे डरा-धमका सकता है, तो वह गलत है। मैं बहुत मजबूत आदमी हूं।” उन्होंने कहा कि सुनवाई के दौरान न्यायाधीशों द्वारा पूछे गए सवालों को बिना समझे लोग कथित निष्कर्ष निकाल लेते हैं और सोशल मीडिया पर कहानी गढ़ देते हैं।
बेंच में शामिल जस्टिस जॉयमाला बागची ने भी दोटूक कहा कि न्यायाधीश की टिप्पणियों को पक्षपात का आधार नहीं बनाया जा सकता। उन्होंने स्पष्ट किया कि ट्रायल जज पहले केस में मिले दोष सिद्ध होने से प्रभावित नहीं होंगे और सिर्फ मौजूदा सबूतों के आधार पर फैसला देंगे।
रेवन्ना की ओर से पेश वरिष्ठ अधिवक्ता सिद्धार्थ लूथरा और सिद्धार्थ दवे ने ट्रायल जज की कुछ टिप्पणियों को रिकॉर्ड से हटाने की मांग की, जिस पर न्यायमूर्ति बागची ने तीखी प्रतिक्रिया दी—“वकील न्यायिक अधिकारियों को ब्लैकमेल नहीं कर सकते।”
CJI ने सलाह दी कि रेवन्ना के वकील हाई कोर्ट में जाकर माफी मांगें, क्योंकि न्यायाधीश की सामान्य टिप्पणियों के आधार पर पक्षपात का आरोप लगाना “सरासर अनैतिक” है। उन्होंने कहा कि सुप्रीम कोर्ट हाई कोर्ट के आदेश में दखल देकर गलत संदेश नहीं देना चाहता।
CJI ने आगे कहा, “अदालत में काल्पनिक स्थितियां रखी जाती हैं। हम टिप्पणियां करते हैं, पर इसका मतलब यह नहीं कि न्यायाधीशों पर आरोप लगा दिए जाएं।” उन्होंने यह भी स्वीकार किया कि मामलों की भारी संख्या के कारण कभी-कभी न्यायाधीशों से गलतियां हो सकती हैं, पर न्यायिक प्रक्रिया उन्हें सुधारती रहती है।

