नई दिल्ली, 12 दिसम्बर (अशोक “अश्क”) देश की सबसे बड़ी और दुनिया की पांचवीं सबसे बड़ी एयरलाइन इंडिगो बीते 11 दिनों से अपने इतिहास के सबसे भीषण परिचालन संकट से जूझ रही है। रोजाना 2300 उड़ानें भरने वाली और घरेलू बाजार में 60% हिस्सेदारी रखने वाली इस दिग्गज कंपनी का मार्केट कैप करीब 21,000 करोड़ रुपये तक लुढ़क चुका है। इसी उथल-पुथल के बीच गुरुवार को नागर विमानन महानिदेशालय (डीजीसीए) ने सख्त कदम उठाते हुए चार फ्लाइट इंस्पेक्टरों को तत्काल प्रभाव से निलंबित कर दिया।

यह कार्रवाई उस वक्त हुई, जब इंडिगो यात्रियों को रिफंड के बाद अतिरिक्त मुआवजा देने का ऐलान कर नुकसान नियंत्रण की कोशिश कर रही थी। वहीं, एयरलाइन के सीईओ पीटर एल्बर्स भी दूसरी बार डीजीसीए के समक्ष पेश हुए। संकट इतना गहरा है कि शुक्रवार को बेंगलुरू एयरपोर्ट से 54 उड़ानें—31 आगमन और 23 प्रस्थान—रद्द करनी पड़ीं। इससे पहले दो दिनों में दिल्ली और बेंगलुरू से 200 से ज्यादा उड़ानें रद्द की जा चुकी हैं।
उधर, डीजीसीए ने जांच को युद्धस्तर पर तेज कर दिया है। शीर्ष अधिकारी इंडिगो मुख्यालय में डेरा डाले हुए हैं। जॉइंट डीजी संजय ब्रह्माने के नेतृत्व में बनी समिति एयरलाइन के मानव संसाधन, रोस्टर सिस्टम और एक नवंबर से लागू नए पायलट ड्यूटी-रेस्ट नियमों की गहन समीक्षा कर रही है। डीजीसीए ने साफ कहा है कि “संचालन में खामियों की जड़ तक पहुंचने के लिए हर पहलू की जांच होगी।”
इंडिगो ने 3–5 दिसंबर को फंसे और घंटों लाइन में परेशान हुए यात्रियों के लिए 10 हजार रुपये के ट्रैवल वाउचर जारी करने की घोषणा की है—हालांकि यह राहत केवल चुनिंदा प्रभावित यात्रियों को मिलेगी। ट्रैवल पार्टनर से टिकट लेने वालों के लिए एयरलाइन ने अलग प्रक्रिया शुरू की है।
इंडिगो के लिए यह संकट न केवल प्रतिष्ठा, बल्कि भरोसे की सबसे कठिन परीक्षा बन चुका है।

