बक्सर, 19 दिसंबर (विक्रांत) डुमरी, जिसे आज भी “साह की डुमरी” के नाम से जाना जाता है, की पहचान दानवीर, ममतामयी और ज्ञान की साक्षात देवी धरिक्षणा कुंवरि से है। उन्होंने अपने जीवन को समाज और शिक्षा के उत्थान के लिए समर्पित कर दिया। कोटि-कोटि छात्रों और युवाओं के जीवन में ज्ञान की ज्योति जलाने वाली धरिक्षणा कुंवरि बक्सर जिले में शिक्षा की नींव रखने वाली अग्रणी शख्सियत थीं।धरिक्षणा कुंवरि ने बक्सर जिले का पहला कॉलेज डी.के. कॉलेज, डुमरांव की स्थापना कर शिक्षा के क्षेत्र में ऐतिहासिक कार्य किया।

इसके अलावा डुमरी में प्लस टू श्रीकृष्ण प्रसाद उच्च विद्यालय, बक्सर में धरिक्षणा कुंवर गर्ल्स स्कूल, धरिक्षणा कुंवर धर्मशाला तथा कोइलवर का टीबी अस्पताल उनकी दानशीलता के ज्वलंत प्रमाण हैं। आज उनकी स्मृति में डुमरी में डी.के. मेमोरियल कॉलेज संचालित हो रहा है। इतना ही नहीं, उनके दान से आज भी बनारस हिंदू विश्वविद्यालय में दो छात्रों को छात्रवृत्ति मिल रही है।

उनकी पुण्यतिथि पर उनके पौत्र एवं सुप्रसिद्ध साहित्यकार डॉ. अरुण मोहन भारवि ने कहा कि भारतीय समाज उन्हीं के प्रति ऋणी है, जिन्होंने आत्मीयता से समाज के विकास में योगदान दिया।धरिक्षणा कुंवरि की स्मृति में आज दोपहर जिले के विभिन्न स्कूलों व कॉलेजों में श्रद्धांजलि समारोह आयोजित किए जाएंगे। डी.के. कॉलेज डुमरांव की प्राचार्या डॉ. वीणा कुमारी और वरीय प्राध्यापक प्रो. उषा रानी ने बताया कि धार्मिक अनुष्ठान सहित भव्य आयोजन की सभी तैयारियां पूरी कर ली गई हैं।

