
बक्सर, 20 दिसम्बर (विक्रांत) डुमरांव स्थित वीर कुंवर सिंह कृषि महाविद्यालय का सभागार उस समय ऊर्जा, उत्साह और संकल्प से भर उठा, जब नए शैक्षणिक सत्र में नामांकित छात्र-छात्राओं के लिए भव्य दीक्षा कुंभ का आयोजन किया गया। यह आयोजन केवल औपचारिक स्वागत नहीं, बल्कि नवप्रवेशी विद्यार्थियों को शिक्षा के वास्तविक उद्देश्य, सामाजिक उत्तरदायित्व और व्यावहारिक जीवन मूल्यों से जोड़ने का प्रभावशाली मंच बना।

कार्यक्रम के मुख्य अतिथि शिक्षा विभाग के एडवाइजर सह सीनियर आईएएस वैद्यनाथ यादव रहे, जबकि विशिष्ट अतिथि के रूप में बिहार कृषि विश्वविद्यालय के डीन डॉ. एके साह उपस्थित रहे। घंटों चले संबोधनों के दौरान विद्यार्थियों को शिक्षा, अनुशासन और नवाचार से जुड़े अनेक महत्वपूर्ण सूत्र मिले।

मंच पर एसोसिएट डीन सह प्रिंसिपल डॉ. पारसनाथ, एलपीएम बीएएसयू के एसोसिएट प्रोफेसर सह वैज्ञानिक डॉ. आर.के. निराला, असिस्टेंट प्रोफेसर डॉ. मणिभूषण सहित कई अनुभवी शिक्षक और कृषि वैज्ञानिक मौजूद रहे।मुख्य अतिथि वैद्यनाथ यादव ने कहा कि शिक्षा केवल डिग्री तक सीमित नहीं, बल्कि समाज और राष्ट्र के लिए उपयोगी नागरिक गढ़ने की प्रक्रिया है। उन्होंने कृषि को विज्ञान, तकनीक और नवाचार का संगम बताते हुए छात्रों से इसे व्यवहार में उतारने का आह्वान किया। विशिष्ट अतिथि डॉ. एके साह ने अनुशासन, सतत अध्ययन और शोध प्रवृत्ति को सफलता की कुंजी बताया।डॉ. पारसनाथ ने कहा कि महाविद्यालय विद्यार्थियों में सोचने और नवाचार की क्षमता विकसित करने के लिए प्रतिबद्ध है। वहीं डॉ. निराला और डॉ. मणिभूषण ने ईदगाह के हामिद और चिमटे के उदाहरण से संवेदनशीलता व नैतिक शिक्षा का महत्व समझाया।कार्यक्रम के अंत में विद्यार्थियों ने प्रेरक वातावरण के लिए आभार जताया। दीक्षा कुंभ ने यह संदेश स्पष्ट किया कि शिक्षा पुस्तकों से आगे बढ़कर समाज निर्माण की सतत प्रक्रिया है।

