दक्षिण भारत के तमिलनाडु से उत्तर बिहार तक आस्था की ऐतिहासिक यात्रा, विश्व का सबसे बड़ा एकल पत्थर से निर्मित शिवलिंग गोपालगंज पहुंचा

गोपालगंज, 04 जनवरी (टीएन मिश्रा) धार्मिक, सांस्कृतिक और शिल्पकला के क्षेत्र में देश के इतिहास में एक नया अध्याय जुड़ने जा रहा है। तमिलनाडु राज्य में निर्मित विश्व का सबसे बड़ा एकल पत्थर से बना शिवलिंग हजारों किलोमीटर की ऐतिहासिक यात्रा तय करते हुए बिहार के गोपालगंज जिले में पहुंच चुका है। जहां उत्तर प्रदेश बिहार की सीमा पर स्थित बल्थरी में विधिवत पूजन के बाद धार्मिक न्यास परिषद टीम द्वारा पूजा अर्चना के बाद उसे पूर्वी चंपारण के कल्याणपुर प्रखंड के कैथवलिया गांव के लिए रवाना होगा।

लगभग 3 करोड़ रुपये की लागत व 10 वर्षों में निर्मित यह शिवलिंग अपने आकार, वजन और शिल्पकला के कारण देशभर में चर्चा का विषय बना हुआ है। यह विशाल शिवलिंग तमिलनाडु के चेंगलपट्टू जिले अंतर्गत महाबलीपुरम क्षेत्र के पट्टीकड्डु गांव में तैयार किया गया है। यह गांव सातवीं शताब्दी के पल्लव वंश काल से ही पत्थर तराशने की उत्कृष्ट कला के लिए विख्यात रहा है। यहीं दक्षिण भारतीय शिल्प परंपरा के अनुरूप इस शिवलिंग का निर्माण किया गया,जिसमें लगभग 10 वर्षों का समय लगा। करीब 2300 से 2400 किलोमीटर की लंबी दूरी तय कर यह शिवलिंग दक्षिण भारत से उत्तर भारत की ओर बढ़ा और लगभग एक माह की सतत यात्रा के बाद गोपालगंज जिले के कुचायकोट क्षेत्र में पहुंचा है। शिवलिंग के आगमन की सूचना मिलते ही श्रद्धालुओं की भारी भीड़ उमड़ पड़ी और जिला प्रशासन के वरीय अधिकारियों सहित आम लोगों ने दर्शन कर पूजा-अर्चना की।

इस ऐतिहासिक धार्मिक परियोजना का नेतृत्व धार्मिक न्यास परिषद के सदस्य सयान कुणाल, स्वर्गीय किशोर कुणाल के पुत्र, द्वारा किया जा रहा है। उनके मार्गदर्शन में यह शिवलिंग अंततः पूर्वी चंपारण जिले के केसरिया के समीप कैथवलिया गांव में निर्मित रामायण मंदिर के गर्भगृह में स्थापित किया जाएगा।शिवलिंग के गोपालगंज आगमन को लेकर जिले भर में विशेष उत्साह और श्रद्धा का माहौल देखा जा रहा है। इसे देखने के लिए बड़ी संख्या में लोग सड़क किनारे एकत्र हुए। 5 जनवरी को प्रातः 11 बजे गोपालगंज में विशेष वैदिक पूजा-अर्चना का कार्यक्रम निर्धारित किया गया है।-शिवलिंग की प्रमुख विशेषताएंऊंचाई: लगभग 33 फीट (10 मीटर)वजन: 210 मीट्रिक टन (लगभग 2 लाख किलोग्राम)निर्माण सामग्री: ब्लैक ग्रेनाइट पत्थरशिल्प शैली: दक्षिण भारतीय पारंपरिक शिल्प कलाकुल लागत: लगभग 3 करोड़ रुपयेनिर्माण अवधि: 10 वर्षमुख्य शिल्पकार: लोकनाथविशेषता: विश्व का सबसे बड़ा एकल पत्थर से निर्मित शिवलिंगपरिवहन व्यवस्था: 96 पहिया विशेष ट्रकइस शिवलिंग में 1008 छोटे छोटे शिवलिंग की आकिर्ति बनाई गई है। शिवलिंग न केवल धार्मिक आस्था का केंद्र बनेगा,बल्कि उत्तर व दक्षिण भारत की सांस्कृतिक एकता,परंपरा और शिल्पकला की महान विरासत का प्रतीक भी होगा।

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