नई दिल्ली, 23 नवम्बर (अशोक “अश्क”) दक्षिण अफ्रीका में आयोजित जी20 सम्मेलन में प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी ने ग्लोबल साउथ की चिंताओं को प्रभावी ढंग से उठाते हुए चार महत्वपूर्ण वैश्विक प्रस्ताव प्रस्तुत किए। अपने संबोधन में उन्होंने दुनिया को प्रभावित कर रहे गंभीर मुद्दों—ड्रग्स, आतंकवाद, स्वास्थ्य संकट, पारंपरिक ज्ञान संरक्षण और कौशल विकास—पर ठोस और संयुक्त कार्रवाई की आवश्यकता पर बल दिया।

प्रधानमंत्री मोदी ने कहा कि भारत का सुझाव है कि जी20 के तहत एक वैश्विक पारंपरिक ज्ञान भंडार (Global Traditional Knowledge Repository) बनाया जाए। उन्होंने कहा कि भारत का प्राचीन और गहन ज्ञान इसका आधार बन सकता है, जो मानवता के सामूहिक ज्ञान को संरक्षित कर भावी पीढ़ियों तक पहुंचाने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाएगा।
उन्होंने अफ्रीका कौशल गुणक पहल (G20–Africa Skill Multiplier Initiative) का प्रस्ताव रखते हुए कहा कि अफ्रीका की युवा प्रतिभा को सशक्त बनाना वैश्विक हित में है। इसका लक्ष्य अगले दस वर्षों में दस लाख प्रमाणित ट्रेनर्स तैयार करना है, जो आगे करोड़ों युवाओं को कौशल प्रदान करेंगे। प्रधानमंत्री ने कहा कि यह ट्रेन-द-ट्रेनर्स मॉडल पर आधारित होगा, जिसे जी20 देश संयुक्त रूप से सहयोग और वित्तीय सहायता दे सकते हैं।
स्वास्थ्य आपात स्थितियों और प्राकृतिक आपदाओं से निपटने के लिए प्रधानमंत्री मोदी ने जी20 वैश्विक स्वास्थ्य सेवा प्रतिक्रिया टीम बनाने का प्रस्ताव रखा। यह टीम प्रशिक्षित मेडिकल विशेषज्ञों से मिलकर बनाई जाएगी, जो किसी भी बड़े वैश्विक संकट की स्थिति में तुरंत तैनात की जा सकेगी।
ड्रग्स और आतंकवाद के गठजोड़ को “वैश्विक सुरक्षा के लिए गंभीर खतरा” बताते हुए प्रधानमंत्री ने कहा कि फेंटेनिल जैसे घातक ड्रग्स सार्वजनिक स्वास्थ्य, सामाजिक स्थिरता और सुरक्षा के लिए चुनौती बने हुए हैं। इस पर अंकुश लगाने के लिए उन्होंने ड्रग-टेरर कनेक्शन को रोकने हेतु जी20 स्तर पर साझा पहल का प्रस्ताव रखा, जिसमें वित्त, शासन और सुरक्षा से जुड़े तंत्र को एकजुट करने की बात शामिल है।
सम्मेलन के इतर प्रधानमंत्री मोदी ने ब्रिटेन के प्रधानमंत्री केअर स्टार्मर, मलेशिया के प्रधानमंत्री अनवर इब्राहिम, फ्रांस के राष्ट्रपति इमैनुएल मैक्रों, दक्षिण कोरिया के राष्ट्रपति ली जे-म्युंग, ब्राजील के राष्ट्रपति लूला दा सिल्वा और संयुक्त राष्ट्र महासचिव एंतोनियो गुतारेस से द्विपक्षीय मुलाकात भी की।
उन्होंने कहा कि भारत-अफ्रीका एकजुटता ऐतिहासिक रूप से मजबूत रही है और अफ्रीकन यूनियन का जी20 में स्थाई सदस्य बनना इसका बड़ा उदाहरण है। अब आवश्यकता है कि वैश्विक संस्थाओं में ग्लोबल साउथ की आवाज और बुलंद हो तथा सभी राष्ट्र मिलकर अधिक संतुलित वैश्विक व्यवस्था के निर्माण की दिशा में कदम बढ़ाएं।

