
बक्सर, 24 फरवरी (विक्रांत) भौगोलिक संकेतक (GI) अधिकृत उपयोगकर्ताओं की संख्या में बिहार ने ऐतिहासिक छलांग लगाते हुए देश में प्रथम स्थान हासिल कर लिया है। राज्य में कुल 2,059 अधिकृत उपयोगकर्ता पंजीकृत हैं, जो राष्ट्रीय स्तर पर सर्वाधिक हैं। बिहार ने 1,764 उपयोगकर्ताओं वाले महाराष्ट्र को 295 उपयोगकर्ताओं से पीछे छोड़कर नई मिसाल कायम की है। इस बड़ी उपलब्धि में बिहार कृषि विश्वविद्यालय, सबौर (बीएयू) की निर्णायक भूमिका रही है।

राज्य के कुल 2,059 अधिकृत उपयोगकर्ताओं में से 1,710 (लगभग 83 प्रतिशत) उपयोगकर्ता बीएयू द्वारा प्रोत्साहित जीआई उत्पादों से जुड़े हैं, जबकि 349 अन्य उत्पादों से संबंधित हैं।जीआई उत्पादों में मगही पान 1,001 अधिकृत उपयोगकर्ताओं के साथ शीर्ष पर है। इसके अलावा कतरनी चावल (358), मखाना (229), भागलपुर सिल्क (223), जर्दालू आम (92), शाही लीची (27), मधुबनी पेंटिंग (51) समेत अन्य उत्पाद शामिल हैं।कुलपति डॉ. डी. आर. सिंह ने इसे किसानों, कारीगरों और संस्थागत सहयोग की सामूहिक जीत बताया। वहीं जीआई सुविधा केंद्र के नोडल पदाधिकारी डॉ. अनिल कुमार सिंह ने कहा कि अब ट्रेसबिलिटी, ब्रांडिंग और बाजार विस्तार पर विशेष ध्यान दिया जाएगा।

बीएयू के जनसंपर्क पदाधिकारी डॉ. राजेश कुमार ने स्पष्ट किया कि विश्वविद्यालय की सक्रिय पहल ने बिहार को राष्ट्रीय स्तर पर अग्रणी राज्य बनाने में निर्णायक भूमिका निभाई है। GI पंजीकरण से उत्पादों को कानूनी सुरक्षा और वैश्विक पहचान मिल रही है, जिससे किसानों व कारीगरों की आय में स्थायी वृद्धि की उम्मीद जगी है।

