नई दिल्ली, 04 नवम्बर (अशोक। “अश्क”) पाकिस्तान की खुफिया एजेंसी इंटर-सर्विस इंटेलिजेंस (ISI) पर एक बार फिर अंतरराष्ट्रीय स्तर पर गंभीर आरोप लगे हैं। बांग्लादेशी पत्रकार सलाहुद्दीन शोएब चौधरी ने दावा किया है कि आईएसआई दशकों से इस्लामी उग्रवादी संगठनों और आतंकवादी समूहों के जरिये नशीली दवाओं की तस्करी कर रही है। इसके जरिए वह एक सुनियोजित “नार्को-जिहाद” चला रही है, जिसका मकसद गैर-मुस्लिम देशों, विशेष रूप से भारत और हिंदू समुदायों को निशाना बनाना है।

वीकली ब्लिट्ज में प्रकाशित अपने लेख में चौधरी ने कहा कि आईएसआई इस अवैध कारोबार में कई अंतरराष्ट्रीय आतंकी संगठनों के साथ सीक्रेट तरीके से काम कर रही है। इनमें लेबनान का हिज्बुल्लाह, नाइजीरिया का बोको हरम, अल-कायदा से जुड़े गुट, और दाऊद इब्राहिम की डी-कंपनी शामिल हैं। चौधरी के अनुसार, आईएसआई और डी-कंपनी का कोलंबिया, मैक्सिको, वेनेजुएला, निकारागुआ तथा अन्य दक्षिण अमेरिकी देशों के ड्रग माफियाओं से भी गहरा संबंध है। इतना ही नहीं, इन संगठनों ने सीरिया के अपदस्थ शासक बशर-अल-असद के साथ अरबों डॉलर के मेथ व्यापार में भी सहयोग किया है।
चौधरी ने चेताया कि बोको हरम, अल-कायदा और डी-कंपनी के बीच बना यह नापाक गठजोड़ भारत के लिए गंभीर खतरा है। बोको हरम, दाऊद और आईएसआई के समर्थन से भारत के नार्को-वितरण नेटवर्क में घुसपैठ कर चुका है और मादक पदार्थों की तस्करी के जरिए आतंकी गतिविधियों के लिए धन जुटा रहा है।
उन्होंने आगे कहा कि बांग्लादेश में सत्ता परिवर्तन के बाद आईएसआई और दाऊद इब्राहिम की नजर अब ढाका पर है। मौजूदा भारत-विरोधी यूनुस शासन का फायदा उठाते हुए आईएसआई ने डी-कंपनी के साथ मिलकर बांग्लादेश में ड्रग नेटवर्क का तेजी से विस्तार किया है। इस गठजोड़ का उद्देश्य न केवल भारत में ड्रग्स की आपूर्ति बढ़ाना है, बल्कि एक सशक्त अंतरराष्ट्रीय तस्करी चैनल स्थापित करना भी है।
चौधरी के मुताबिक, पाकिइसस्तानी सैन्य प्रतिष्ठान बांग्लादेश में हुए जिहादी तख्तापलट को भारत के खिलाफ रणनीतिक अवसर के रूप में देख रहा है। उन्होंने चेताया कि आईएसआई-दाऊद गठजोड़ की यह “नार्को-जिहाद” गतिविधि भारत ही नहीं, बल्कि अमेरिका और अन्य वैश्विक शक्तियों के लिए भी गंभीर सुरक्षा चुनौती बन सकती है।

