नई दिल्ली, 25 सितम्बर (अशोक “अश्क”) प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और अमेरिका के पूर्व राष्ट्रपति और 2024 के राष्ट्रपति चुनाव के प्रबल दावेदार डोनाल्ड ट्रंप के बीच जल्द ही एक अहम मुलाकात हो सकती है। दोनों नेताओं के बीच मजबूत व्यक्तिगत रिश्तों को देखते हुए यह बैठक तय मानी जा रही है। हालांकि, अब तक इसकी तारीख और स्थान को लेकर आधिकारिक घोषणा नहीं की गई है।

गुरुवार को समाचार एजेंसी एएनआई ने एक अमेरिकी अधिकारी के हवाले से बताया कि भारत और अमेरिका के बीच रणनीतिक साझेदारी लगातार मजबूत हो रही है और दोनों देशों के शीर्ष नेतृत्व के बीच संवाद की संभावनाएं और भी बढ़ गई हैं। अमेरिकी अधिकारी ने कहा, “मुझे पूरा यकीन है कि मोदी और ट्रंप की मुलाकात होगी। उनके बीच सकारात्मक संबंध हैं और दोनों नेता एक-दूसरे को सम्मान की नजर से देखते हैं। अगर यह बैठक इस साल नहीं होती तो अगले साल जरूर होगी। हम इसकी योजना बना रहे हैं।”
इस बीच, अमेरिका ने यह भी स्पष्ट कर दिया है कि वह कश्मीर मुद्दे पर कोई मध्यस्थता नहीं करेगा। अमेरिकी विदेश विभाग के एक वरिष्ठ अधिकारी ने कहा, “कश्मीर भारत और पाकिस्तान के बीच का द्विपक्षीय मुद्दा है। अमेरिका की नीति शुरू से स्पष्ट है – अगर भारत और पाकिस्तान मदद मांगते हैं, तो अमेरिका तैयार है, लेकिन जबरन मध्यस्थता की कोई मंशा नहीं है।” इस बयान से पाकिस्तान को एक और कूटनीतिक झटका लगा है, जो लंबे समय से अमेरिका से इस मुद्दे में हस्तक्षेप की मांग करता रहा है।
गौरतलब है कि हाल ही में डोनाल्ड ट्रंप ने प्रधानमंत्री मोदी को उनके 75वें जन्मदिन पर फोन कर बधाई दी थी और उनकी नेतृत्व क्षमता की सराहना की थी। ट्रंप ने मोदी को “अच्छा दोस्त” बताते हुए भारत-अमेरिका संबंधों को “बेहद खास” बताया था। उन्होंने रूस-यूक्रेन युद्ध को खत्म करने में भारत की भूमिका की भी सराहना की थी।
हालांकि, दोनों देशों के बीच व्यापार और वीजा नीतियों को लेकर कुछ तनाव भी देखने को मिला है। ट्रंप प्रशासन ने भारतीय आयात पर 50% तक शुल्क लगाया है, जिसमें रूसी तेल पर 25% अतिरिक्त शुल्क शामिल है। इसके अलावा, एच-1बी वीजा के लिए 100,000 डॉलर का नया शुल्क प्रस्तावित किया गया है, जिससे भारतीय आईटी पेशेवरों और स्टार्टअप्स को झटका लग सकता है।
इन चुनौतियों के बावजूद, भारत और अमेरिका के बीच हाल ही में हुई विदेश मंत्री स्तर की बातचीत में प्राथमिकता वाले क्षेत्रों में सहयोग को बढ़ाने पर सहमति बनी है। दोनों देशों के बीच ऊर्जा, रक्षा और तकनीकी क्षेत्रों में साझेदारी को और मजबूत करने की दिशा में काम जारी है।
मोदी-ट्रंप की संभावित मुलाकात इन संबंधों को नई ऊंचाई दे सकती है और यह संकेत देती है कि दोनों देश भू-राजनीतिक साझेदारी को और गहरा करने के लिए प्रतिबद्ध हैं।

