पटना, 04 दिसम्बर (पटना डेस्क) राजधानी पटना के सबसे बड़े सरकारी अस्पताल PMCH में बुधवार को स्थिति उस समय बिगड़ गई जब जूनियर डॉक्टर अचानक हड़ताल पर चले गए। अस्पताल की OPD और इमरजेंसी दोनों सेवाएँ पूरी तरह बंद कर दी गईं, जिससे इलाज के लिए पहुंचे मरीज बेहाल हो गए।

हालात ऐसे बने कि 2 हजार से अधिक मरीज बिना इलाज लौटने को मजबूर हो गए।हंगामे की शुरुआत 70 वर्षीय सुरेश सिंह की मौत के बाद हुई, जिसके बाद परिजन भड़क गए और मेडिसिन इमरजेंसी में डॉक्टरों से मारपीट का मामला सामने आया। घटना के विरोध में जूनियर डॉक्टरों ने तुरंत सभी सेवाएँ ठप कर हड़ताल की घोषणा कर दी।दूसरी तरफ मृतक के बेटे अमन सिंह ने आरोप लगाया कि डॉक्टरों ने हेलमेट, लाठी-डंडों और स्टिक से हमला किया। उन्होंने कहा कि उनकी बहन ने पिता की बॉडी दोबारा चेक करने का अनुरोध किया तो डॉक्टर नाराज़ हो गए और हाथ पर मार दिया। अमन का दावा है कि घटना का वीडियो उसके मोबाइल में दर्ज है।डॉक्टरों की तरफ से भी परिजनों पर महिला डॉक्टरों सहित कई स्टाफ से हाथापाई करने का आरोप लगा है। दोनों पक्षों ने थाने में आवेदन दिया है और पुलिस मामले की जांच कर रही है। जेडीए ने सुरक्षा की मांग को लेकर हड़ताल जारी रखने का एलान किया है। उनका कहना है कि बार-बार अनुरोध के बावजूद प्रशासन प्रभावी कदम नहीं उठा रहा, जिससे ऐसी घटनाएँ बढ़ रही हैं। डॉक्टरों की तीन प्रमुख मांगों पर कार्रवाई होने तक हड़ताल जारी रहेगी।

