
नई दिल्ली, 10 फरवरी (अशोक “अश्क”) हाल ही में अमेरिका और बांग्लादेश के बीच हुए पारस्परिक व्यापार समझौते ने दक्षिण एशिया की कृषि राजनीति में नई हलचल पैदा कर दी है। जहां भारत ने अपने डेयरी और कृषि सेक्टर को लेकर अमेरिका को सीमित पहुंच दी है, वहीं बांग्लादेश ने लगभग अपने सभी दरवाजे खोल दिए हैं। विशेषज्ञों का मानना है कि यह फैसला बांग्लादेश के कृषि और डेयरी सेक्टर के लिए गंभीर खतरा बन सकता है।व्हाइट हाउस द्वारा जारी संयुक्त बयान के अनुसार, इस समझौते के तहत बांग्लादेश अमेरिकी कृषि उत्पादों को बड़े पैमाने पर बाजार पहुंच देगा।

इसमें डेयरी, बीफ, पोल्ट्री, सोया उत्पाद, ट्री नट्स और फल शामिल हैं। बदले में अमेरिका ने बांग्लादेशी उत्पादों पर लगाए गए पारस्परिक टैरिफ को 37 प्रतिशत से घटाकर 19 प्रतिशत कर दिया है और कुछ उत्पादों पर शून्य टैरिफ का आश्वासन दिया है।समझौते की शर्तों के अनुसार बांग्लादेश अमेरिकी एजेंसियों के सर्टिफिकेट को मान्यता देगा और अमेरिकी सैनिटरी व फाइटोसैनिटरी मानकों को स्वीकार करेगा। साथ ही जीआई नियमों में ढील से अमेरिकी चीज और मीट उत्पादकों को सामान्य नामों के इस्तेमाल की छूट मिलेगी। इसके तहत बांग्लादेश अमेरिका से करीब 3.5 अरब डॉलर के कृषि उत्पाद और 15 अरब डॉलर के ऊर्जा उत्पाद खरीदेगा।बांग्लादेश की अर्थव्यवस्था में कृषि की भूमिका बेहद अहम है।

वर्ष 2023-24 में जीडीपी का 11.19 प्रतिशत हिस्सा खेती से आया, जबकि करीब 38 प्रतिशत आबादी इसी पर निर्भर है। लाइवस्टॉक सेक्टर लगभग 20 प्रतिशत लोगों को प्रत्यक्ष रोजगार देता है। ऐसे में भारी सब्सिडी वाले अमेरिकी कृषि उत्पादों की आमद से स्थानीय किसान कड़ी प्रतिस्पर्धा में फंस सकते हैं।2024 में ही बांग्लादेश ने 51.9 करोड़ डॉलर के डेयरी उत्पाद आयात किए थे। विशेषज्ञों का अनुमान है कि इस डील के बाद मीट और डेयरी उत्पादन में 4 प्रतिशत तक गिरावट आ सकती है। साथ ही जीएमओ और बायोटेक फूड्स को बिना स्थानीय जांच के अनुमति मिलने से पर्यावरण और स्वास्थ्य जोखिम भी बढ़ेंगे।यह समझौता एक दोधारी तलवार की तरह है। एक ओर सस्ते उत्पाद बढ़ते मध्य वर्ग की मांग पूरी करेंगे, दूसरी ओर स्थानीय उत्पादक हाशिए पर जा सकते हैं। 2026 में एलडीसी स्टेटस खत्म होने के बाद अगर निर्यात छूट भी घटी, तो बांग्लादेश की अर्थव्यवस्था पर दोहरा दबाव पड़ना तय माना जा रहा है।

