सेंट्रल डेस्क, 27 सितम्बर (राजेश कुमार झा) अखिल भारतीय कांग्रेस कमेटी के सदस्य इन्तेखाब आलम ने बिहार विधानसभा चुनाव से पहले मुसलमान समाज की ठोस हिस्सेदारी की मांग उठाई है। उन्होंने कहा कि जब मुसलमानों की आबादी लगभग 20 प्रतिशत है और यह समाज दशकों से कांग्रेस, राजद और गठबंधन के अन्य दलों को लगभग एकतरफा 100 प्रतिशत वोट देता आया है, तो विधानसभा में मुसलमानों को कम से कम 48 सीटों की हिस्सेदारी मिलनी चाहिए।

आलम ने कहा, मुसलमान समाज ने कभी गठबंधन से मुंह नहीं मोड़ा। हम लगातार और मजबूती के साथ वोट देते हैं। हमारे वोट में बिखराव नहीं होता। जब आबादी 20 प्रतिशत है और वोट 100 प्रतिशत एक तरफा गठबंधन को जाता है, तो हिस्सेदारी 48 सीटों से कम क्यों हो।
उन्होंने स्पष्ट किया कि कांग्रेस अगर 100 सीटों पर चुनाव लड़ती है तो कम से कम 20 सीट मुसलमान समाज को देनी चाहिए। इसी तरह राजद और अन्य घटक दलों पर भी यही फार्मूला लागू होना चाहिए।
राजनीतिक विश्लेषकों का मानना है कि सीमांचल, मिथिलांचल और मगध समेत कई इलाकों की सीटों पर मुस्लिम मतदाता हार-जीत का सीधा फैसला करते हैं। इसके बावजूद, चुनाव बाद हिस्सेदारी की मांग अक्सर नजरअंदाज कर दी जाती है।
आलम ने कहा कि मुसलमान समाज अब केवल वोट देने तक सीमित नहीं रहेगा। हम ठोस हिस्सेदारी चाहते हैं। अगर वोट 100 प्रतिशत हमारा है तो हिस्सेदारी भी पूरी 48 सीट हमारी होनी चाहिए। जिसकी जितनी आबादी, उसकी उतनी हिस्सेदारी का फार्मूला महागठबंधन को अपनाना ही होगा,वरना मुसलमान समाज की नाराजगी गठबंधन की सियासत को हिला सकती है।
अंत में आलम ने महागठबंधन के सभी वरिष्ठ नेताओं मल्लिकार्जुन खड़गे, लालू प्रसाद यादव, राहुल गांधी, तेजस्वी यादव, दीपांकर भट्टाचार्य और अन्य सहयोगी दलों से अपील की कि वे इस मुद्दे को गंभीरता से लें और मुसलमान समाज की 48 सीटों की हिस्सेदारी सुनिश्चित करें।

