
नई दिल्ली, 16 मार्च (अशोक “अश्क”) पश्चिम एशिया में बढ़ते तनाव के बीच भारत में इस्राइल के राजदूत रूसेन अजर ने सोमवार को बड़ा और महत्वपूर्ण बयान दिया। उन्होंने स्पष्ट कहा कि न तो अमेरिका और न ही इजरायल का ईरान पर सैन्य हमला करने या उसकी जमीन पर कब्जा करने का कोई इरादा है। राजदूत ने कहा कि उनका मुख्य उद्देश्य ईरान के अंदरूनी हालात में सुधार देखना है। उनका मानना है कि वहां की जनता यदि चाहे तो अपनी सरकार पर दबाव बनाकर नीतियों में बदलाव ला सकती है।

उन्होंने कहा कि किसी भी देश में स्थायी बदलाव तब ही आता है जब वह बदलाव वहां के लोगों की इच्छा और प्रयास से हो। रूसेन अजर के अनुसार, इस्राइल और अमेरिका का मानना है कि सैन्य कार्रवाई के बजाय नागरिकों के जरिए होने वाला परिवर्तन ज्यादा प्रभावी और स्थायी होता है। इससे न केवल ईरान के लोगों की स्थिति बेहतर हो सकती है, बल्कि पूरे पश्चिम एशिया में स्थिरता और शांति को भी बढ़ावा मिलेगा।उन्होंने यह भी कहा कि एक शांत और सुरक्षित पश्चिम एशिया से सभी देशों को लाभ होगा। इससे इस्राइल, खाड़ी देशों और पूरी दुनिया की सुरक्षा मजबूत होगी। अंतरराष्ट्रीय समुदाय भी चाहता है कि यह क्षेत्र उन खतरों से मुक्त रहे जो ईरान की मौजूदा नीतियों से पैदा हो रहे हैं।

यह बयान ऐसे समय आया है जब इजरायल और ईरान के बीच तनाव चरम पर है। दोनों देश एक-दूसरे पर गंभीर आरोप लगा रहे हैं। जहां इस्राइल ईरान पर मिसाइल कार्यक्रम और हथियारबंद समूहों को समर्थन देने का आरोप लगाता है, वहीं ईरान अपने परमाणु और सैन्य कार्यक्रम को आत्मरक्षा के लिए जरूरी बताता है।पिछले वर्षों में दोनों देशों के बीच साइबर हमले और गुप्त ऑपरेशनों की घटनाएं भी सामने आई हैं, जिनका असर वैश्विक व्यापारिक मार्गों और ऊर्जा आपूर्ति पर पड़ रहा है। हालांकि राजदूत के इस बयान से संकेत मिलता है कि फिलहाल इस्राइल युद्ध नहीं, बल्कि राजनीतिक बदलाव की राह देख रहा है।

