
समस्तीपुर, 27 अक्तूबर (समस्तीपुर डेस्क) बिहार के समस्तीपुर जिले के उजियारपुर प्रखंड स्थित भगवानपुर कमला गांव के समाजसेवी राजू सहनी ने इस बार भी अपने क्षेत्र में छठ महापर्व को खास बना दिया है। हर वर्ष की तरह इस बार भी उन्होंने उजियारपुर क्षेत्र के 28 पंचायतों में स्थित 32 छठ घाटों को अपने निजी खर्च से सजाया और पूरे प्रबंधन की जिम्मेदारी खुद संभाली।
राजू सहनी ने बताया कि यह कार्य वे वर्षों से समाजसेवा और लोक परंपरा को आगे बढ़ाने के उद्देश्य से करते आ रहे हैं। उन्होंने कहा कि छठ पर्व सिर्फ धार्मिक नहीं बल्कि सामाजिक एकता का प्रतीक है।
उजियारपुर का देवखाल चौर, जहां सबसे प्रमुख घाट स्थित है, अपने आप में ऐतिहासिक और धार्मिक महत्व रखता है। स्थानीय मान्यता के अनुसार, यह स्थल महाभारत कालीन लाक्षागृह कांड से जुड़ा हुआ है। कहा जाता है कि जब पांडवों को लाक्षागृह में जलाकर मारने की साजिश की गई थी, तब वे यहीं से एक सुरंग के माध्यम से भाग निकले थे। इसी स्थान पर बाद में द्रौपदी ने कार्तिक मास में छठ पूजा की थी, जिसके बाद से यह परंपरा आज तक जारी है।
स्थानीय मान्यता यह भी है कि देवखाल चौर में दैवीय शक्ति के कारण कभी पानी नहीं सूखता, भले ही आसपास सूखा क्यों न पड़े। यही वजह है कि हर साल कमला और आसपास के गांवों के लोग यहां छठ पर्व मनाने के लिए बड़ी संख्या में आते हैं।
ग्रामीणों और श्रद्धालुओं का कहना है कि राजू सहनी हर साल घाटों की सफाई, सजावट, रोशनी और सुरक्षा की पूरी जिम्मेदारी खुद उठाते हैं। वहीं, राजू सहनी का कहना है कि देवखाल चौर की मिट्टी अत्यंत उर्वरक है और यहां स्थित जयमंगला स्थान धार्मिक दृष्टि से विशेष महत्व रखता है। उन्होंने सरकार से इस स्थल को पर्यटक स्थल के रूप में विकसित करने की मांग की है, ताकि इसकी ऐतिहासिक पहचान और बढ़ सके।

