नई दिल्ली, 31 अगस्त (अशोक “अश्क”) प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी इस समय चीन के तियानजिन शहर में चल रहे 25वें शंघाई सहयोग संगठन (एससीओ) शिखर सम्मेलन में भाग लेने पहुंचे हैं। इस दौरान उन्होंने चीनी राष्ट्रपति शी चिनफिंग के साथ एक महत्वपूर्ण द्विपक्षीय बैठक की, जो लगभग 40 मिनट तक चली। बैठक में दोनों देशों के बीच रिश्तों को सुधारने और विश्वास बहाली पर ज़ोर दिया गया।

बैठक के दौरान प्रधानमंत्री मोदी ने एससीओ की अध्यक्षता के लिए राष्ट्रपति चिनफिंग को शुभकामनाएं दीं और कहा कि यह बैठक भारत-चीन संबंधों को मजबूत करने में मील का पत्थर साबित होगी। उन्होंने कहा, “विश्वास, सम्मान और संवेदनशीलता के आधार पर रिश्ते मजबूत होते हैं।” मोदी ने यह भी उल्लेख किया कि पिछले साल रूस के कजान में हुई बैठक से संबंधों में सकारात्मक बदलाव आए हैं।
प्रधानमंत्री ने कहा कि सीमा पर सैनिकों की वापसी के बाद शांति का माहौल बना है और दोनों देशों के विशेष प्रतिनिधियों के बीच सीमा प्रबंधन को लेकर सहमति बनी है। कैलाश मानसरोवर यात्रा फिर से शुरू कर दी गई है और सीधी उड़ानें भी बहाल हो रही हैं। मोदी ने यह भी कहा कि भारत और चीन के सहयोग से 2.8 अरब लोगों के हित जुड़े हैं, जो पूरी मानवता के कल्याण का मार्ग प्रशस्त करेंगे।
चीनी राष्ट्रपति शी चिनफिंग ने भी भारत-चीन संबंधों को मजबूत करने पर सहमति जताई। उन्होंने कहा कि दोनों देश प्राचीन सभ्यताएं हैं, जो वैश्विक दक्षिण के प्रमुख सदस्य हैं। उन्होंने भारत और चीन को ऐसे मित्र और साझेदार बनने की आवश्यकता पर बल दिया जो एक-दूसरे की सफलता में भागीदार हों।
प्रधानमंत्री मोदी की यह चीन यात्रा कई मायनों में अहम मानी जा रही है। यह सात साल में उनकी पहली चीन यात्रा है और पिछले दस महीनों में राष्ट्रपति चिनफिंग के साथ दूसरी मुलाकात है। इससे पहले दोनों नेता ब्रिक्स 2024 सम्मेलन के दौरान रूस के कजान में मिले थे।
प्रधानमंत्री ने एक्स पर लिखा, “तियानजिन, चीन पहुंच गया हूं। SCO शिखर सम्मेलन में विचार-विमर्श और विभिन्न विश्व नेताओं से मिलने का इंतजार है।” यह यात्रा भारत-चीन संबंधों को नई दिशा देने की संभावनाओं से भरपूर मानी जा रही है।

