पटना, 21 नवम्बर (पटना डेस्क) बिहार विधानसभा चुनाव में कांग्रेस की करारी हार के बाद पार्टी के भीतर असंतोष गहराता जा रहा है। इसी उथल-पुथल के बीच शुक्रवार को बिहार महिला कांग्रेस की प्रदेश अध्यक्ष डॉ. सरवत जहां फातमा ने अपने पद से इस्तीफा देकर संगठन में नई हलचल पैदा कर दी। उन्होंने कांग्रेस अध्यक्ष मल्लिकार्जुन खड़गे को संबोधित त्यागपत्र भेजते हुए पार्टी की चुनावी रणनीति, विशेषकर महिलाओं को दिए गए सीमित प्रतिनिधित्व पर गहरी नाराजगी जताई।

अपने पत्र में फातमा ने लिखा कि वह “भारी मन और नैतिक जिम्मेदारी” के तहत यह पद छोड़ रही हैं। उन्होंने स्पष्ट कहा कि चुनाव में कांग्रेस द्वारा महिलाओं को मात्र 4% टिकट दिए जाना बेहद निराशाजनक है। महिला कांग्रेस की अध्यक्ष होने के नाते इसे उन्होंने अपनी नैतिक जिम्मेदारी से जोड़ा। उन्होंने कहा कि उनका लक्ष्य बिहार में महिला नेतृत्व को मजबूत करना था, लेकिन टिकट वितरण ने पूरे प्रयास को कमजोर कर दिया।
फातमा ने बताया कि पिछले 28 महीनों में उन्होंने बूथ स्तर तक संगठन को मजबूत करने के लिए कई अभियान चलाए टीम गठन, प्रशिक्षण शिविर, घर-घर संपर्क व सदस्यता अभियान और स्थानीय मुद्दों पर महिला मोर्चा की सक्रियता। उनका कहना था कि इन प्रयासों का उद्देश्य चुनाव में महिलाओं की बड़ी भागीदारी सुनिश्चित करना था, पर यह लक्ष्य अधूरा रह गया।
त्यागपत्र में उन्होंने कांग्रेस की महिला सशक्तिकरण की विरासत इंदिरा गांधी, राजीव गांधी और सोनिया गांधी के योगदान का उल्लेख करते हुए कहा कि वह आगे भी पार्टी की विचारधारा के प्रति समर्पित रहेंगी। उन्होंने यह भी कहा कि परंपरागत रूप से बिहार महिला कांग्रेस अध्यक्षों को टिकट मिलता रहा है, लेकिन इस बार इस परंपरा को तोड़ा गया।
अंत में उन्होंने लिखा कि “इतने गौरवशाली इतिहास वाली पार्टी में महिलाओं को सिर्फ 4% टिकट मिलना दुखद है”, लेकिन वह संघर्ष और प्रतिबद्धता के साथ आगे भी कांग्रेस व महिला अधिकारों के लिए काम करती रहेंगी।
चुनाव नतीजों में कांग्रेस 19 से घटकर महज 6 सीटों पर सिमट गई है, जिससे पार्टी के अंदर तीखा असंतोष उभर रहा है।

