बक्सर,13 सितंबर (विक्रांत) बिहार का दुसरा केला और पपीता का टिश्यू कल्चर प्रयोगशाला का निर्माण कार्य अब तक अधर में लटका हुआ है। जब कि प्रयोगशाला को इस साल के अप्रैल में शुरू किए जाने की कृषि कालेज प्रबंधन द्वारा घोषणा की गई थी। किसानों की आय बढ़ाने व उद्यान का विस्तार करने के उद्येश्य से टिश्यू कल्चर प्रयोगशाला के निर्माण कार्य को लेकर एजेंसी राजदीप इंटर प्राईजेज को सौंपी गई है।

बीएयू सबौर की पहल पर राज्य सरकार के कृषि विभाग द्वारा टिश्यू कल्चर प्रयोगशाला के निर्माण को दो करोड़ नौ लाख की राशि स्वीकृती प्रदान की गई है। निर्माणाधीन टिश्यू कल्चर के लिए प्रथम चरण में विश्वविद्यालय स्तर करीब 75 लाख की राशि से कृषि कालेज प्रबंधन को उपलब्ध कराई जा चुकी है। कृषि कालेज परिसर में केला और पपीता का टिश्यू कल्चर प्रयोगशाला का निर्माण कार्य शुरू होने को लेकर क्षेत्रीय किसान आस लगाए बैठे है।पर इस वित्तीय वर्ष 2025 में टिश्यू कल्चर प्रयोगशाला शुरू किए जाने की कौन कहे अभी तक इसका निर्माण कार्य अधर में लटका हुआ है।कृषि विभाग के जानकारों का कहना है कि शाहाबाद की मिटटी धान के अलावा केला और पपीता की खेती के लिए भी बेहतर है। सरकार के आरकेवीवाई स्पीड योजना के अंर्तगत कृषि कालेज डुमरांव में बनने वाले टिश्यू कल्चर के शुरू होने के बाद से केला व पपीता का फसल महज आठ से नौ माह में तैयार हो जाएगा। पुरानी तकनीकी के अनुसार सामान्य तौर पर पपीता और केला का फसल तैयार होने में एक से डेढ़ साल का समय लग जाता है। आश्चर्य की बात तो यह है कि इस निर्माणाधीन प्रयोगशाला स्थल के पास किसी तरह का श्यामपटट् तक नहीं लगा है।प्राक्कलित राशि से संबंधित बोर्ड का अता-पता नहीं है। कृषि कालेज में केला और पपीता के टिश्यू कल्चर प्रयोगशाला के शुरू होने के बारे में पूछे जाने पर प्राचार्य डा.पारस नाथ ने चुप्पी साध ली।

