कोशी प्रदेश में सत्ता का ‘म्यूजिकल चेयर,चार वर्षों में 6 सरकारें,अब सातवीं बार नए समीकरण की तैयारी

विराटनगर,विशेष संवाददाता। नेपाल के कोशी प्रदेश में राजनीतिक अस्थिरता का सिलसिला थमने का नाम नहीं ले रहा है। पिछले चार वर्षों में यहां छह बार सरकार का गठन और पतन हो चुका है, जबकि अब तीन दलों के नए गठबंधन के साथ सातवीं बार सरकार बनाने की कवायद तेज हो गई है। बार-बार बदलते सत्ता समीकरणों और लगातार मंत्रिमंडल विस्तार ने न केवल प्रदेश की राजनीतिक स्थिरता पर सवाल खड़े किए हैं, बल्कि संघीय व्यवस्था की उपयोगिता को लेकर भी बहस छेड़ दी है। जनआंदोलन के बाद उभरकर सामने आई राष्ट्रीय स्वतंत्र पार्टी ने अपने पहले राष्ट्रीय महाधिवेशन में प्रादेशिक सभाओं को भंग करने का प्रस्ताव पारित किया था। उस समय नेपाली कांग्रेस,नेकपा एमाले व नेकपा माओवादी केंद्र जैसे प्रमुख दलों ने इसे संघवाद पर हमला बताते हुए विरोध किया था। लेकिन अब यही दल कोशी प्रदेश में लगातार बदलते गठबंधनों और सरकारों के कारण आलोचनाओं के घेरे में हैं।कोशी प्रदेश कांग्रेस संसदीय दल के नेता उद्धव थापा ने स्वीकार किया कि बार-बार सरकार बदलने से संघीय व्यवस्था पर सवाल उठाने वालों को मजबूती मिली है। उन्होंने कहा कि सत्ता समीकरणों के लगातार बदलने से सबसे अधिक नुकसान कोशी प्रदेश को हुआ है और जनता के बीच गलत संदेश गया है। वहीं प्रदेश सरकार के आर्थिक मामलों एवं योजना मंत्री विदुरकुमार लिङ्थेप ने भी माना कि वर्तमान परिस्थितियों में सरकार बदलना उचित नहीं है। उनका कहना था कि देश बड़े राजनीतिक आंदोलनों और संकटों से गुजर चुका है, लेकिन राजनीतिक दल अभी भी सत्ता परिवर्तन में ही उलझे हुए हैं, जबकि प्रदेश सरकारों को स्थिरता देने की जरूरत थी।
-चार वर्षों में छह सरकारें,18 बार मंत्रिमंडल में फेरबदल
9 जनवरी 2023 से शुरू हुए दूसरे प्रादेशिक सभा कार्यकाल के दौरान कोशी प्रदेश सत्ता बचाने और गिराने की राजनीति का केंद्र बना रहा। इस अवधि में छह बार सरकार बनी और गिरी, जबकि मुख्यमंत्रियों ने सत्ता संतुलन बनाए रखने के लिए 18 बार मंत्रिमंडल का विस्तार या पुनर्गठन किया। यदि प्रस्तावित नई सरकार बनती है तो यह सातवीं सरकार होगी और 19वीं बार मंत्रिमंडल का गठन होगा। इस पूरे दौर में मंत्री और राज्य मंत्री मिलाकर चार दर्जन से अधिक नेताओं ने शपथ ली, लेकिन प्रदेश के विकास और जनहित के मुद्दों पर अपेक्षित प्रगति नहीं हो सकी।
-मुख्यमंत्री की कुर्सी बनी ‘म्यूजिकल चेयर’
इस कार्यकाल में हिक्मतकुमार कार्की सबसे अधिक तीन बार मुख्यमंत्री बने, जबकि उद्धव थापा दो बार मुख्यमंत्री पद तक पहुंचे। कांग्रेस के बागी नेता केदार कार्की भी एक बार मुख्यमंत्री बनने में सफल रहे। हालांकि अदालत के आदेश, संविधान की विभिन्न धाराओं के तहत सरकार गठन और बदलते राजनीतिक गठबंधनों के कारण कोई भी सरकार अपना कार्यकाल स्थिरता से पूरा नहीं कर सकी।
-मंत्री पद बना सत्ता बचाने का हथियार
सरकार गिरने के खतरे के बीच मुख्यमंत्री लगातार मंत्रिमंडल का विस्तार करते रहे। आंकड़ों के अनुसार, छह सरकारों के दौरान 59 बार मंत्री और राज्य मंत्री की नियुक्तियां हुईं, जिनमें कई नेताओं को दो, तीन और यहां तक कि चार बार मंत्री बनने का अवसर मिला। नेपाली कांग्रेस के प्रदीपकुमार सुनुवार सबसे अधिक चार बार मंत्री बने। वहीं कमलप्रसाद जबेगू और राजेन्द्र कार्की तीन-तीन बार मंत्री पद पर रहे। इसके अलावा तिलकुमार मेन्याङ्बो, निर्मला लिम्बू, जीवन आचार्य, बुद्धिकुमार राजभण्डारी, रामकुमार खत्री, पाँचकर्ण राई, एकराज कार्की, सिर्जना राई, लिलाबल्लभ अधिकारी, रामप्रसाद महतो, रामबहादुर मगर, गणेशप्रसाद उप्रेती और नारायण बहादुर मगर सहित 13 से अधिक नेता दो-दो बार मंत्री बने।
-गठबंधन बदलते रहे,सरकारें गिरती रहीं
2023 में हिक्मतकुमार कार्की ने माओवादी केंद्र,राप्रपा और जसपा के समर्थन से पहली सरकार बनाई और मंत्रालयों की संख्या 13 से घटाकर 9 कर दी। बाद में केंद्र में राजनीतिक समीकरण बदलने के बाद सहयोगी दलों के समर्थन वापस लेने से उनकी सरकार गिर गई।
इसके बाद कांग्रेस नेता उद्धव थापा ने माओवादी, नेकपा (एस) और जसपा के समर्थन से दो बार सरकार बनाई, लेकिन आवश्यक बहुमत साबित नहीं कर पाने के कारण दोनों बार उन्हें पद छोड़ना पड़ा।
फिर सर्वोच्च अदालत के आदेश पर हिक्मतकुमार कार्की दोबारा मुख्यमंत्री बने, लेकिन विश्वास मत हासिल नहीं कर सके। इसके बाद संविधान की धारा 168(5) के तहत कांग्रेस के बागी नेता केदार कार्की मुख्यमंत्री बने। बाद में केंद्र में सत्ता परिवर्तन के साथ फिर एमाले-माओवादी गठबंधन की सरकार बनी और हिक्मतकुमार कार्की तीसरी बार मुख्यमंत्री बने। बाद में माओवादी के समर्थन वापस लेने पर कांग्रेस ने कार्की सरकार को समर्थन दिया और कांग्रेस के कई नेता मंत्रिमंडल में शामिल हुए। इसी दौरान मानव तस्करी के आरोपों में घिरे लिलाबल्लभ अधिकारी के इस्तीफे के बाद रेवतीरमण भण्डारी को मंत्री बनाया गया। इसके बाद भी मंत्रिमंडल में कई बार फेरबदल हुआ और वर्तमान सरकार अस्तित्व में आई।
-फिर बदल सकते हैं सत्ता समीकरण
अब कांग्रेस अपने मंत्रियों को सरकार से वापस बुलाने की तैयारी में है। इसके साथ ही कोशी प्रदेश में एक बार फिर नए राजनीतिक समीकरण बनने लगे हैं। यदि यह प्रयास सफल होता है तो प्रदेश में चार वर्षों के भीतर सातवीं सरकार का गठन होगा और राजनीतिक अस्थिरता का नया अध्याय जुड़ जाएगा।
राजनीतिक विश्लेषकों का मानना है कि यदि यही स्थिति जारी रही तो कोशी प्रदेश में संघीय व्यवस्था की प्रभावशीलता पर उठ रहे सवाल और अधिक गहरे हो सकते हैं। जनता के बीच यह धारणा भी मजबूत हो रही है कि सत्ता परिवर्तन और मंत्री पदों के बंटवारे की राजनीति विकास और सुशासन पर भारी पड़ रही है।

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