

पटना,डेस्क 28 मार्च। बिहार में खाद की जमाखोरी व कालाबाजारी पर लगाम लगाने के लिए कृषि विभाग ने सख्त रुख अपनाया है। कृषि मंत्री राम कृपाल यादव ने विभागीय अधिकारियों को स्पष्ट निर्देश दिया है कि बिहार के साथ-साथ सीमावर्ती नेपाल क्षेत्रों तक खाद की कालाबाजारी पर कड़ी नजर रखी जाएं।

जिलों में हर सप्ताह खाद की उपलब्धता और वितरण की समीक्षा बैठक कर उसकी रिपोर्ट मुख्यालय को भेजने का निर्देश दिया गया है। शनिवार को पटना के मीठापुर स्थित कृषि भवन में आयोजित प्रेस वार्ता में कृषि मंत्री ने कहा कि पश्चिम एशिया में जारी युद्ध जैसी वैश्विक परिस्थितियों में खाद की कालाबाजारी की आशंका बढ़ जाती है। इसे ध्यान में रखते हुए विभागीय अधिकारियों को पूरी सतर्कता बरतने को कहा गया है। उन्होंने किसानों से अपील की कि वे खाद की कमी को लेकर किसी भी अफवाह पर ध्यान न दें, क्योंकि राज्य में मांग से अधिक खाद उपलब्ध है। मंत्री ने बताया कि वर्तमान में बिहार में 2.48 लाख मीट्रिक टन यूरिया,1.43 लाख मीट्रिक टन डीएपी, 2.07 लाख मीट्रिक टन एनपीके,0.39 लाख मीट्रिक टन एमओपी और 1.02 लाख मीट्रिक टन एसएसपी उपलब्ध है। किसानों की जरूरत के अनुसार खाद की लगातार आपूर्ति सुनिश्चित की जा रही है, ताकि उन्हें किसी तरह की परेशानी न हो और वे कालाबाजारी का शिकार न बनें।उन्होंने चेतावनी दी कि खाद की कालाबाजारी या जमाखोरी की शिकायत मिलने पर रिटेलर और स्टॉकिस्ट के साथ-साथ संबंधित अधिकारियों पर भी कार्रवाई की जाएगी। जिला से प्रखंड स्तर तक निगरानी बढ़ा दी गई है। साथ ही जैविक खेती को बढ़ावा देने के लिए धरती बचाओ कमेटी के गठन की योजना है और पैक्सों में लाइसेंस देने की प्रक्रिया तेज की जा रही है, जिससे किसानों को आसानी से खाद उपलब्ध हो सके। कृषि मंत्री ने यह भी बताया कि हाल में आपदा प्रभावित किसानों को करीब 200 करोड़ रुपये की राहत राशि दी गई है। खराब मौसम से फसलों को हुए नुकसान का आकलन किया जा रहा है और पात्र किसानों को मुआवजा देने की प्रक्रिया जारी है। इस मौके पर विभागीय प्रधान सचिव नर्मदेश्वर लाल ने कहा कि खाद की कालाबाजारी रोकने के लिए विभाग पूरी तरह सतर्क है। निदेशक सुमन सौरभ यादव ने बताया कि विभाग खरीफ फसल की तैयारी में जुटा है और कृषि एप के माध्यम से किसान विभागीय योजनाओं की जानकारी प्राप्त कर लाभ उठा सकते हैं।

