पटना, 9 सितंबर (अशोक “अश्क”) बिहार में आगामी विधानसभा चुनाव की आहट के बीच मुख्यमंत्री नीतीश कुमार ने बड़ा राजनीतिक और सामाजिक फैसला लेते हुए आंगनबाड़ी सेविकाओं और सहायिकाओं के मानदेय में बढ़ोतरी की घोषणा की है। मुख्यमंत्री ने सोमवार को सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म ‘एक्स’ (पूर्व ट्विटर) पर पोस्ट कर यह जानकारी साझा की। उन्होंने बताया कि आंगनबाड़ी सेविकाओं के मानदेय में 2000 रुपये और सहायिकाओं के मानदेय में 1500 रुपये की वृद्धि की गई है।

अब आंगनबाड़ी सेविकाओं को प्रति माह 7000 रुपये की बजाय 9000 रुपये तथा सहायिकाओं को 4000 रुपये के बदले 5500 रुपये मासिक मानदेय मिलेगा। मुख्यमंत्री ने अपने पोस्ट में लिखा, “बिहार में बच्चों और गर्भवती महिलाओं के पोषण और जीवन स्तर को सुधारने में आंगनबाड़ी सेविकाओं और सहायिकाओं की महत्वपूर्ण भूमिका रही है। उनके इस योगदान का सम्मान करते हुए हमने उनके मानदेय में वृद्धि करने का निर्णय लिया है।”
मुख्यमंत्री ने आगे कहा कि वर्ष 2005 में जब उनकी सरकार बनी, तभी से महिलाओं और बच्चों के स्वास्थ्य और पोषण को प्राथमिकता दी गई। इसके लिए समेकित बाल विकास परियोजना (ICDS) के तहत छह प्रकार की सेवाएं राज्यभर में संचालित की जा रही हैं, जिनका संचालन आंगनबाड़ी केंद्रों के माध्यम से होता है। इन केंद्रों पर सेविकाएं और सहायिकाएं लाभार्थियों तक पोषण, स्वास्थ्य परामर्श, टीकाकरण, स्वास्थ्य जांच, पूर्व-विद्यालय शिक्षा जैसी सेवाएं पहुंचा रही हैं।
नीतीश कुमार ने कहा कि इन कर्मियों का मनोबल बढ़ाने और उनके कार्यों की सराहना के रूप में यह निर्णय लिया गया है, जिससे भविष्य में समेकित बाल विकास सेवाएं और अधिक सशक्त होंगी।
यह फैसला ऐसे समय पर आया है जब पटना के गर्दनीबाग में 8 सितंबर को आंगनबाड़ी सेविकाओं और सहायिकाओं ने प्रदर्शन किया था। वे मानदेय बढ़ोतरी, सम्मानजनक व्यवहार और प्रोत्साहन राशि की मांग को लेकर सड़कों पर उतरी थीं। सैकड़ों की संख्या में जुटी इन कर्मियों ने सरकार पर शोषण और उपेक्षा का आरोप लगाया था। उनकी शिकायत थी कि अतिरिक्त कार्य कराने के बावजूद उन्हें किसी तरह की प्रोत्साहन राशि नहीं मिलती।
हालांकि अब सरकार के इस फैसले से आंगनबाड़ी सेविकाओं और सहायिकाओं के बीच नाराजगी कुछ हद तक कम होने की उम्मीद की जा रही है। यह कदम एक ओर जहां कार्यरत कर्मियों के लिए राहत लेकर आया है, वहीं दूसरी ओर इसे चुनावी नजरिए से भी अहम माना जा रहा है।
बिहार में करीब 2.5 लाख से अधिक आंगनबाड़ी सेविकाएं और सहायिकाएं कार्यरत हैं। मानदेय में वृद्धि से सीधे तौर पर इस बड़े वर्ग को लाभ मिलेगा, जो ग्रामीण और पिछड़े क्षेत्रों में महिला और बाल विकास योजनाओं की रीढ़ मानी जाती हैं।

