नई दिल्ली, 19 अक्तूबर (अशोक “अश्क”) दीपावली और छठ पर्व पर अपने घर लौटने की उम्मीद लिए सूरत के उधना रेलवे स्टेशन पर उमड़ी प्रवासी मजदूरों की भारी भीड़ ने सारी व्यवस्थाओं को ध्वस्त कर दिया है। उत्तर प्रदेश, बिहार और झारखंड जाने वाले हजारों प्रवासी शुक्रवार रात से ही स्टेशन पर डटे हुए हैं, लेकिन ट्रेनों की संख्या कम और भीड़ अत्यधिक होने के कारण अफरा-तफरी का माहौल बना हुआ है

स्टेशन परिसर से लेकर बाहर की सड़कों और आसपास के रिहायशी इलाकों तक लोगों की लंबी कतारें दिखाई दे रही हैं। हर तरफ से एक ही आवाज़ सुनाई दे रही है—”भैया, घर जाना है, ट्रेन में जगह नहीं मिल रही!” कुछ लोग बीते 12 से 18 घंटे तक भूखे-प्यासे कतार में खड़े हैं। धूप हो या धूल, महिलाएं, बच्चे, बूढ़े और युवा—हर कोई अपने घर लौटने की उम्मीद में डटा हुआ है।
रेलवे प्लेटफॉर्म पर फर्श पर बैठे यात्रियों की तादाद इतनी अधिक है कि चलना-फिरना मुश्किल हो गया है। कई लोग स्टेशन के आसपास के घरों और दुकानों के सामने छांव की तलाश में समय बिता रहे हैं।
हालांकि रेलवे प्रशासन का कहना है कि अतिरिक्त ट्रेनों की व्यवस्था की गई है, लेकिन ज़मीनी सच्चाई इससे उलट नज़र आ रही है। जिन यात्रियों के पास कन्फर्म टिकट है, उन्हें भी ट्रेन में चढ़ने का मौका नहीं मिल पा रहा है। बिहार जा रहे एक यात्री ने बताया कि वो रात 10 बजे से लाइन में खड़ा है, लेकिन 12 घंटे बाद भी उसका नंबर नहीं आया। इसी तरह प्रयागराज की ट्रेन का इंतजार कर रहे एक अन्य व्यक्ति ने कहा कि शाम सात बजे से लाइन में खड़े हैं, लेकिन अब तक ट्रेन नहीं मिली।
मुंबई और दिल्ली जैसे अन्य महानगरों से भी ऐसे ही दृश्य सामने आ रहे हैं, जहां ट्रेनों में भारी भीड़ है और डिब्बों के अंदर लोग ठसाठस भरे हुए हैं। रेलवे के सामने सबसे बड़ी चुनौती अब यात्रियों की सुरक्षित आवाजाही सुनिश्चित करना बन गई है।

