जब निर्दलीय नेता ने हराया मुख्यमंत्री को और खुद बन गए बिहार के सीएम, 1967 के ऐतिहासिक विधानसभा चुनाव की कहानी

पटना, 2 सितम्बर (अशोक “अश्क) बिहार की सियासत में साल 1967 एक ऐतिहासिक मोड़ लेकर आया, जब पहली बार किसी निर्दलीय उम्मीदवार ने सिटिंग मुख्यमंत्री को चुनाव में हराया और खुद मुख्यमंत्री की कुर्सी तक पहुंच गए। यह चुनाव सिर्फ एक व्यक्ति की जीत नहीं, बल्कि उस दौर की राजनीतिक अस्थिरता और बदलाव की बानगी था।
1967 के बिहार विधानसभा चुनाव में पहली बार त्रिशंकु विधानसभा बनी। किसी भी पार्टी को स्पष्ट बहुमत नहीं मिला। कांग्रेस को सबसे ज्यादा सीटें जरूर मिलीं, लेकिन वह सरकार बनाने की स्थिति में नहीं थी। यही नहीं, इस चुनाव में तत्कालीन मुख्यमंत्री कृष्ण बल्लभ सहाय को पटना पश्चिम (आज की बांकीपुर सीट) से निर्दलीय उम्मीदवार महामाया प्रसाद सिन्हा ने भारी मतों से पराजित कर दिया।


महामाया बाबू की यह जीत इतनी चर्चित हुई कि वे सत्ता की दौड़ में सबसे आगे निकल गए। संयुक्त सोशलिस्ट पार्टी, जनसंघ, सीपीआई, प्रजा सोशलिस्ट पार्टी और जन क्रांति दल जैसे गैर-कांग्रेसी दलों ने मिलकर सरकार बनाने का फैसला किया। संसोपा के कर्पूरी ठाकुर मुख्यमंत्री पद के मजबूत दावेदार थे, लेकिन अंततः सबकी सहमति महामाया प्रसाद सिन्हा पर बनी और वे बिहार के पहले गैर-कांग्रेसी मुख्यमंत्री बन गए।
हालांकि उन्होंने चुनाव निर्दलीय लड़ा था, बाद में वे रामगढ़ के पूर्व जमींदार कमाख्या नारायण सिंह के नेतृत्व वाले जन क्रांति दल में शामिल हो गए। सीवान के एक कायस्थ परिवार में जन्मे महामाया बाबू ने 5 मार्च 1967 को मुख्यमंत्री पद की शपथ ली। लेकिन सत्ता में विभिन्न विचारधाराओं वाले दलों का गठबंधन ज्यादा दिन टिक नहीं सका। अंतर्कलह और अस्थिरता के चलते उन्होंने 26 जनवरी 1968 को इस्तीफा दे दिया। उनका कार्यकाल 329 दिनों का रहा।
उनके बाद सतीश प्रसाद सिन्हा मात्र 5 दिन के लिए मुख्यमंत्री बने। सरकारों के इस अस्थिर दौर में कांग्रेस ने एक बार फिर मैदान में वापसी की कोशिश की और बीपी मंडल के नेतृत्व में नई सरकार बनाई। लेकिन कांग्रेस के इस कदम से पार्टी के अंदर ही फूट पड़ गई। केबी सहाय के विरोधी गुट के नेता बिनोदानंद झा के नेतृत्व में 17 विधायकों ने पार्टी से बगावत कर लोकतांत्रिक कांग्रेस बना ली और मंडल सरकार से समर्थन वापस ले लिया।
बीपी मंडल की सरकार सिर्फ 51 दिन ही चल पाई। इसके बाद भोला पासवान शास्त्री विपक्षी विधायकों के समर्थन से बिहार के पहले दलित मुख्यमंत्री बने, लेकिन उनका कार्यकाल भी केवल 100 दिनों का रहा।
लगातार सरकारों के गिरने और राजनीतिक अस्थिरता के कारण आखिरकार 29 जून 1968 को बिहार विधानसभा भंग कर दी गई और राज्य में राष्ट्रपति शासन लागू कर दिया गया। इस डेढ़ साल के भीतर बिहार ने चार मुख्यमंत्री देखे और अंततः केंद्रीय शासन का सामना करना पड़ा।
1967-68 का यह दौर बिहार के राजनीतिक इतिहास में अस्थिर गठबंधनों, भीतरघात और सियासी उठापटक का प्रतीक बन गया।

More From Author

सुप्रीम कोर्ट ने खारिज की E20 पेट्रोल के खिलाफ याचिका, एथेनॉल मिलावट योजना को दी हरी झंडी

जिला निर्वाचन पदाधिकारी-सह-जिला पदाधिकारी ने किया वी०वी०पैट वेयर हाउस. जितवारपुर का त्रैमासिक निरीक्षण

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *

loader-image
Weather
Patna, IN
2:31 pm, Jun 24, 2026
temperature icon 39°C
Partly cloudy
Humidity: 40 %
Pressure: 999 mb
Wind: 8 mph
Wind Gust: 9 mph
Clouds: 50%
Visibility: 6 km
Sunrise: 5:00 am
Sunset: 6:44 pm
  • Temperature
  • Precipitation
  • Rain Chance
  • Wind
  • Humidity
  • Pressure
3:00 pm
temperature icon
44°/45°°C 0 mm 1% 10 mph 17% 994 mb 0 cm
6:00 pm
temperature icon
38°/42°°C 0 mm 1% 10 mph 25% 995 mb 0 cm
9:00 pm
temperature icon
35°/37°°C 0 mm 1% 15 mph 45% 998 mb 0 cm
12:00 am
temperature icon
33°/34°°C 0 mm 3% 12 mph 57% 997 mb 0 cm
3:00 am
temperature icon
32°/33°°C 0 mm 4% 11 mph 63% 997 mb 0 cm
6:00 am
temperature icon
33°/38°°C 0 mm 2% 11 mph 49% 999 mb 0 cm
9:00 am
temperature icon
40°/43°°C 0 mm 1% 10 mph 30% 999 mb 0 cm
12:00 pm
temperature icon
44°/44°°C 0.01 mm 3% 9 mph 22% 996 mb 0 cm