नई दिल्ली, 6 अक्तूबर (अशोक “अश्क”) बॉलीवुड में ऐसा कम ही होता है जब कोई , पर्दे पर आकर लीड हीरो-हीरोइन पर भारी पड़ जाए। लेकिन 1968 में रिलीज हुई म्यूजिकल कॉमेडी फिल्म ‘पड़ोसन’ में यही हुआ। इस फिल्म में किशोर कुमार ने सिर्फ गाने ही नहीं गाए, बल्कि अपनी दमदार एक्टिंग से पूरी महफिल लूट ली।

ज्योति स्वरूप द्वारा निर्देशित इस फिल्म में सुनील दत्त, सायरा बानो, महमूद, ओमप्रकाश और किशोर कुमार जैसे कलाकार थे। लेकिन दर्शकों के दिलों पर सबसे गहरी छाप किशोर दा ने छोड़ी। फिल्म में उनके निभाए किरदार विद्यापति ने हास्य और संगीत का ऐसा संगम पेश किया, जो आज भी क्लासिक माना जाता है।
फिल्म में 9 गाने थे, जिनमें “कहना है…”, “मेरे सामने वाली खिड़की में…”, और “एक चतुर नार…” जैसे गाने आज भी सदाबहार हैं। खास बात यह रही कि “एक चतुर नार” में किशोर कुमार ने मन्ना डे को मात दी, जो उस समय के स्थापित क्लासिकल सिंगर माने जाते थे। पहले मन्ना डे इस बात से नाराज हो गए थे कि फिल्म में उन्हें हारना है, लेकिन बाद में वे खुद किशोर दा की प्रतिभा के कायल हो गए।
दिलचस्प बात ये है कि किशोर कुमार शुरुआत में ये फिल्म करना ही नहीं चाहते थे। महमूद ने एक महीने तक उनका पीछा किया और आखिरकार उनके घर के बाहर तंबू लगाकर पूरी रात गुजार दी। तब जाकर किशोर कुमार मान गए।
फिल्म का एक गाना “मेरी प्यारी बिंदु” बिना कोरियोग्राफर के शूट हुआ था। उस दिन कोरियोग्राफर नहीं आया, तो किशोर दा ने खुद गाना कोरियोग्राफी किया। फिल्म में महमूद ने एक दक्षिण भारतीय का किरदार निभाया, जिसे निभाने के लिए उन्होंने सिर तक मुंडवा लिया और दक्षिण भारतीयों के बीच रहकर उनकी बोली सीखी।
‘पड़ोसन’ आज भी एक कल्ट क्लासिक है, और किशोर दा का अभिनय इसका सबसे चमकदार पहलू रहा।

