समस्तीपुर, 24 सितंबर (राजेश झा) केंद्र सरकार द्वारा हाल ही में जीएसटी दरों में की गई कटौती के बाद पूरे देश में “महा बचत उत्सव” की चर्चा जोरों पर है, लेकिन हकीकत में आम उपभोक्ताओं को इसका लाभ अभी तक नहीं मिल पाया है। रसोई गैस, दूध, पनीर, मिठाइयाँ, दवाएं और अन्य आवश्यक वस्तुएं अभी भी पुराने दरों पर ही बिक रही हैं।

सरकार ने घोषणा की थी कि नई दरें 22 सितंबर से प्रभावी होंगी, लेकिन तीसरे दिन भी बाजार में इसका कोई असर दिखाई नहीं दे रहा है। थोक और खुदरा विक्रेता साफ तौर पर कह रहे हैं कि मौजूदा स्टॉक पर पहले ही पुरानी दर से टैक्स चुकाया गया है, इसलिए वे कम कीमत पर सामान नहीं बेच सकते। नया स्टॉक आने पर ही उपभोक्ताओं को नई दरों का लाभ मिलेगा।
रसोई गैस आज भी 935 रुपये में बिक रहा है। सुधा के उत्पादों की कीमतों में भी कोई बदलाव नहीं हुआ है। 200 ग्राम पनीर अभी भी 85 रुपये और 500 ग्राम पनीर 205 रुपये में बिक रहा है। सुधा गाय का दूध 54 रुपये और टोंड मिल्क 57 रुपये प्रति लीटर में ही दिया जा रहा है।
हालांकि मिथिला दुग्ध उत्पादक सहकारी समिति के एमडी आरके झा का कहना है कि सुधा के 17 उत्पादों पर दर में बदलाव किया गया है, लेकिन जमीनी हकीकत कुछ और है। सुधा डेयरी के एक कर्मी ने नाम नहीं छापने की शर्त पर बताया कि दूध और दूध उत्पादों के मूल्य की अंतिम स्वीकृति मुख्यमंत्री की सहमति से पटना स्थित कम्फेड मुख्यालय द्वारा दी जाती है। जब तक कम्फेड मूल्य में संशोधन नहीं करता, तब तक उपभोक्ताओं को कोई राहत नहीं मिलेगी।
सवाल यह उठता है कि सरकार के “बचत उत्सव” का असली लाभ किसे मिल रहा है उपभोक्ता को या प्रचार तंत्र को? जब तक मूल्य में वास्तविक बदलाव नहीं होता, तब तक यह महा उत्सव सिर्फ कागजों पर ही सिमट कर रह जाएगा।

