
पटना, 22 दिसम्बर (पटना डेस्क) बिहार की सत्ताधारी पार्टी जनता दल यूनाइटेड (जेडीयू) के लिए वित्तीय वर्ष 2024–25 किसी जैकपॉट से कम नहीं रहा। जहां पिछले वित्तीय वर्ष में पार्टी को महज 1.81 करोड़ रुपये का चंदा मिला था, वहीं 2024–25 में यह आंकड़ा बढ़कर 18.69 करोड़ रुपये तक पहुंच गया है। महज एक साल में जेडीयू की फंडिंग में करीब 932 प्रतिशत की ऐतिहासिक बढ़ोतरी दर्ज की गई है, जिसने राजनीतिक गलियारों में नई बहस छेड़ दी है।

चौंकाने वाली बात यह है कि पार्टी के शीर्ष नेतृत्व के व्यक्तिगत योगदान में भी बड़ा अंतर सामने आया है। मुख्यमंत्री और जेडीयू के राष्ट्रीय अध्यक्ष नीतीश कुमार ने पार्टी को केवल 1.25 लाख रुपये का चंदा दिया, जबकि राज्यसभा के उपसभापति और वरिष्ठ नेता हरिवंश नारायण सिंह ने 3.74 लाख रुपये का योगदान किया। यानी हरिवंश का दान नीतीश कुमार से लगभग तीन गुना अधिक रहा।कुल 18.69 करोड़ रुपये की राशि में सबसे बड़ा हिस्सा इलेक्टोरल ट्रस्ट से आया है।

प्रोग्रेसिव इलेक्टोरल ट्रस्ट से 10 करोड़, प्रूडेंट इलेक्टोरल ट्रस्ट से 5 करोड़ और समाज इलेक्टोरल ट्रस्ट एसोसिएशन से 2 करोड़ रुपये जेडीयू को मिले हैं। साफ है कि पार्टी की फंडिंग का बड़ा आधार चुनिंदा ट्रस्ट रहे हैं।इसके अलावा कई निजी कंपनियों ने भी जेडीयू की झोली भरी। उर्मिला इंटरनेशनल सर्विसेज, सोना बिस्किट्स, नटराज आयरन एंड इंडस्ट्रीज और अनमोल इंडस्ट्रीज जैसी कंपनियों से पार्टी को 40 लाख रुपये से ज्यादा का चंदा मिला।व्यक्तिगत दानदाताओं में पटना के संजय कुमार सिन्हा ने 4.5 लाख और बेंगलुरु के आकाश अग्रवाल ने 10 लाख रुपये दिए। वहीं सांसदों, विधायकों और वरिष्ठ नेताओं ने 72 हजार से 1.01 लाख रुपये तक का योगदान कर पार्टी फंड को और मजबूत किया।

