नई दिल्ली, 16 सितंबर (अशोक “अश्क”) केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह ने सोमवार को एक महत्वपूर्ण बयान में कहा कि झारखंड के बोकारो क्षेत्र से नक्सलवाद का पूरी तरह सफाया हो गया है। यह दावा ऐसे समय पर आया है जब हजारीबाग जिले में एक बड़े नक्सल विरोधी अभियान के तहत तीन शीर्ष माओवादी कमांडरों को सुरक्षा बलों ने ढेर कर दिया है।

गृह मंत्री ने एक्स पर एक पोस्ट के जरिए जानकारी दी कि यह कार्रवाई सीआरपीएफ की कोबरा बटालियन और झारखंड पुलिस की संयुक्त टीम द्वारा की गई। इस अभियान में सबसे बड़ी सफलता एक करोड़ रुपये के इनामी और प्रतिबंधित भाकपा (माओवादी) की केंद्रीय समिति के सदस्य सहदेव सोरेन उर्फ परवेश को मार गिराने के रूप में मिली। सोरेन लंबे समय से झारखंड और आसपास के क्षेत्रों में नक्सली गतिविधियों का मास्टरमाइंड माना जा रहा था।
अमित शाह ने कहा कि इस अभियान में दो अन्य कुख्यात माओवादी रघुनाथ हेम्ब्रम उर्फ चंचल और बीरसेन गंझू उर्फ रामखेलावन को भी सुरक्षा बलों ने मार गिराया। दोनों पर भी भारी इनाम घोषित था और ये माओवादी संगठन की रणनीतिक योजना में महत्वपूर्ण भूमिका निभा रहे थे।
पुलिस सूत्रों के अनुसार, मुठभेड़ सोमवार सुबह हजारीबाग के एक घने जंगल वाले क्षेत्र में हुई, जहां सुरक्षाबलों को माओवादियों की मौजूदगी की खुफिया सूचना मिली थी। ऑपरेशन कई घंटे चला और अंततः सुरक्षा बलों को भारी सफलता मिली।
गृह मंत्री ने अपने पोस्ट में कहा, “सीआरपीएफ और राज्य पुलिस की संयुक्त कार्रवाई में मिली यह सफलता न केवल राज्य बल्कि देश के लिए भी बड़ी उपलब्धि है। इस अभियान के बाद बोकारो क्षेत्र अब नक्सलवाद से पूरी तरह मुक्त हो चुका है।”
शाह ने यह भी दोहराया कि केंद्र सरकार का लक्ष्य 31 मार्च 2026 तक देश से नक्सलवाद को पूरी तरह खत्म करना है। उन्होंने कहा, “सरकार की नीति स्पष्ट है—विकास और सुरक्षा दोनों को साथ लेकर चलना। नक्सलवाद को समाप्त करने के लिए हर आवश्यक कदम उठाए जा रहे हैं। जल्द ही पूरा देश इस समस्या से मुक्त होगा।”
विशेषज्ञों का मानना है कि इस मुठभेड़ के बाद नक्सली नेटवर्क को बड़ा झटका लगा है, खासकर झारखंड के उत्तर-पूर्वी इलाकों में। बोकारो जैसे क्षेत्र का नक्सलमुक्त होना न केवल राज्य के लिए बल्कि समूचे देश की आंतरिक सुरक्षा के लिहाज से बेहद अहम माना जा रहा है।

