पूर्णिया, 26 सितम्बर (राजेश कुमार झा) जिले के पूर्णिया पूर्व प्रखंड के रानीपतरा पंचायत में 5 लोगों को जिंदा जलाने वाली जघन्य नरसंहार के बाद आज भी कई गांवों में धड़ल्ले से चल रहा है झाड़फूंक का धंधा.लोगों का कहना है कि पुलिस प्रशासन चाहे कुछ भी कर ले, ये झाड़फूंक का धंधा कभी भी बंद नहीं हो सकता है.बताते चलें कि रानीपतरा पंचायत के टेटगामा गांव में पिछले कुछ महीने पहले सैकड़ों लोगों के बीच एक परिवार के 5 लोगों को जिंदा जला दिया.इस घटना ने पूरे देश को हिला कर रख दिया.जिसने भी इस घटना के बारे में सुना.उनके रोंगटे खड़े हो गए.इस घटना के बाद पूरा गांव आज वीरान पड़ा हुआ है.

पूरे गांव वाले गिरफ्तारी के डर से अपना घर द्वार छोड़कर कहीं और शरण लिए हुए है. अभी तक इस घटना में संलिप्त 12 लोगों की गिरफ्तारी हो चुकी है.लेकिन इतनी बड़ी घटना के बाबजूद भी आसपास के गांव में रह रहे लोगों ने सबक नहीं ली. बिफोरप्रिंट डिजिटल ने घटना के कुछ महीने बाद टेटगामा के आसपास के आदिवासी गांवों की स्थिति जानने की कोशिश की तो पता चला कि आज भी कई गांवों में झाड़फूंक का खेल बदस्तूर जारी है.स्थानीय लोगों ने कहा कि सर हमलोग बहुत ही गरीब लोग है.हमलोगों के पास साधन की भी कमी है. दवाई भी खरीदने के पैसे नहीं है.इसलिए झाड़फूंक से ही काम चल जाता है.एक स्थानीय लोगों ने बताया कि ये कभी भी बंद नहीं होगा.इन लोगों के पास पैसे रहते हुए भी ये लोग झाड़फूंक पर ही विश्वास करते है.ये लोग झाड़फूंक में काफी पैसे बर्बाद करते है.ये लोग डाक्टर और दवाई पर विश्वास नहीं करते है. रानी पतरा के पीएचसी से हर हफ्ते गांव में डाक्टर आते है. लेकिन उन्हें कोई दिखाने नहीं जाता है.लाइन बाजार में इतना बड़ा सरकारी अस्पताल है. जहां मुफ्त में इलाज एवं दवाइयां दी जाती है.उसके बाबजूद भी वहां नहीं जाना चाहते है.इसके पीछे शिक्षा की बहुत कमी है.गांवों में स्कूल है लेकिन पढ़ने के लिए बच्चों को नहीं भेजेंगे.आंगनबाड़ी है,स्कूल है लेकिन सिर्फ वेतन के लिए.टीचर या आंगनबाड़ी सेविका गांवों ने जाकर गांव वालों से मिले या उन्हें समझाएं तो वो दिन दूर नहीं,जब लोगों का इन झाड़फूंक से विश्वास उठ जाएगा.

