
नई दिल्ली, 18 फरवरी (अशोक “अश्क”) अमेरिका के राष्ट्रपति Donald Trump ने भले ही कई देशों के साथ ट्रेड डील कर टैरिफ में कटौती की हो, लेकिन इसकी कीमत अब भारी निवेश के रूप में वसूली जा रही है। इस नई रणनीति का पहला बड़ा उदाहरण जापान बना है।हालिया समझौते में ट्रंप प्रशासन ने जापान से अमेरिका में 550 अरब डॉलर निवेश की शर्त रखी थी। मंगलवार को प्रशासन ने खुलासा किया कि जापान तीन प्रमुख अमेरिकी प्रोजेक्ट्स में 36 अरब डॉलर की फाइनेंसिंग करेगा। इनमें टेक्सस की ऑयल एक्सपोर्ट फैसिलिटी, जॉर्जिया का इंडस्ट्रियल डायमंड प्लांट और ओहियो का नेचुरल गैस पावर प्लांट शामिल हैं।

ट्रंप ने जापानी सामान पर टैरिफ घटाकर 15 फीसदी करने की घोषणा की थी। लेकिन इसके बदले जापान को अमेरिकी बुनियादी ढांचे और ऊर्जा क्षेत्र में बड़ा निवेश करना होगा। कॉमर्स सेक्रेटरी Howard Lutnick के मुताबिक ओहियो में बनने वाला 33 अरब डॉलर का पावर प्लांट अमेरिका का सबसे बड़ा नेचुरल गैस आधारित संयंत्र होगा, जो सालाना 9.2 गीगावॉट बिजली पैदा करेगा। इस परियोजना का संचालन SB Energy करेगी, जो SoftBank Group की सहायक कंपनी है।इसके अलावा टेक्सस के तट पर स्थित Texas GulfLink डीपवाटर क्रूड ऑयल एक्सपोर्ट प्रोजेक्ट में 2.1 अरब डॉलर का निवेश किया जाएगा। इस परियोजना से हर साल 20 से 30 अरब डॉलर का कच्चा तेल निर्यात होने की उम्मीद है।

जॉर्जिया में सिंथेटिक इंडस्ट्रियल डायमंड प्लांट का निर्माण भी जापानी निवेश से होगा। यह प्लांट Element Six संचालित करेगी, जो De Beers Group का हिस्सा है। 600 मिलियन डॉलर की इस परियोजना से अमेरिका की सिंथेटिक डायमंड ग्रिट की 100% मांग पूरी होगी, जिससे चीन पर निर्भरता घटेगी।टैरिफ में राहत के बदले निवेश की यह शर्त ट्रंप की नई आर्थिक कूटनीति को दर्शाती है। जहां सौदा बराबरी का नहीं, बल्कि रणनीतिक लाभ का है।

