
पटना, 27 दिसम्बर (पटना डेस्क) बिहार में कड़ाके की ठंड ने जनजीवन को कंपा दिया है। तापमान 6.6 डिग्री सेल्सियस तक पहुंच चुका है, लेकिन सियासी पारा इससे कहीं ज्यादा चढ़ा हुआ है। राज्यसभा चुनाव 2026 को लेकर पूर्व मुख्यमंत्री जीतन राम मांझी के तेवर और बयानों के बाद अब नीतीश मंत्रिपरिषद विस्तार की सुगबुगाहट तेज हो गई है।

सूत्रों के अनुसार नए साल में 14 जनवरी, खरमास के बाद मंत्रिमंडल विस्तार पर अंतिम मुहर लग सकती है। मुख्यमंत्री नीतीश कुमार के हालिया दिल्ली दौरे में प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और गृह मंत्री अमित शाह से मुलाकात के बाद तस्वीर लगभग साफ मानी जा रही है।फिलहाल नीतीश मंत्रिपरिषद में 10 मंत्री पद खाली हैं। संवैधानिक प्रावधानों के अनुसार बिहार में मुख्यमंत्री समेत अधिकतम 36 मंत्री बनाए जा सकते हैं। एनडीए के तय फार्मूले के मुताबिक बीजेपी को 17, जदयू को 15 (मुख्यमंत्री सहित), लोजपा को 2 और हम-आरएलएम को एक-एक मंत्री पद मिलना है।

इस हिसाब से बीजेपी के 4 और जदयू के 6 पद रिक्त हैं, जिन्हें जनवरी में भरे जाने की चर्चा है।सूत्र बताते हैं कि विस्तार में जातिगत, सामाजिक और राजनीतिक संतुलन पर खास ध्यान रहेगा। जदयू कोटे से कुशवाहा और अति पिछड़ा वर्ग के नेताओं को मौका मिल सकता है। वर्तमान में कई मंत्रियों पर अतिरिक्त प्रभार है। जदयू के बिजेंद्र यादव के पास 5, विजय चौधरी के पास 4 और श्रवण कुमार व सुनील कुमार के पास 2-2 विभाग हैं। बीजेपी के भी कई मंत्री अतिरिक्त जिम्मेदारी संभाल रहे हैं। विस्तार के बाद नए चेहरों को विभाग सौंपकर बोझ कम किया जाएगा, जिससे सरकार की रफ्तार तेज होने की उम्मीद है।

