नई दिल्ली, 1 अक्तूबर (अशोक “अश्क”) पाकिस्तान का खुला समर्थन करने वाला तुर्की अब भारत की ओर झुकता नजर आ रहा है। इसकी बड़ी वजह है रूस से मिले S-400 मिसाइल सिस्टम को लेकर सामने आई एक चौंकाने वाली रिपोर्ट। तुर्की मीडिया और और कुछ अन्य रिपोर्ट्स के अनुसार, रूस ने तुर्की को 2019 में दिए गए S-400 एयर डिफेंस सिस्टम को वापस खरीदने की पेशकश की है, और उन मिसाइलों को भारत समेत अन्य मित्र देशों को बेचे जाने की योजना पर काम चल रहा है।

यह खबर भारत के लिए सामरिक दृष्टि से बेहद अहम मानी जा रही है, क्योंकि भारत पहले ही रूस से S-400 डिफेंस सिस्टम की खरीद कर चुका है, और अतिरिक्त यूनिट्स पाने का इच्छुक है। रिपोर्ट के मुताबिक, तुर्की अब इस रूसी प्रणाली को लेकर अमेरिका के साथ अपने विवाद को समाप्त करना चाहता है। अमेरिका और नाटो के दबाव में आकर तुर्की अब अपनी डिफेंस पॉलिसी में बदलाव कर रहा है और खुद की एयर डिफेंस प्रणाली विकसित कर रहा है।
तुर्की का S-400 अब तक सक्रिय नहीं हुआ है और NATO की प्रणाली से इसे जोड़ा भी नहीं गया है। कई मिसाइलें अपनी आधी उम्र पार कर चुकी हैं, और उनके मेंटेनेंस पर भारी खर्च आ रहा है। ऐसे में रूस की ओर से इन्हें वापस खरीदने और भारत जैसे देशों को बेचने की रणनीति, रूस के हथियार बाजार में अपनी खोई पकड़ फिर से कायम करने की कोशिश मानी जा रही है।
हालांकि अभी तक रूस या तुर्की की सरकार ने इस डील की आधिकारिक पुष्टि नहीं की है। लेकिन भारत के रक्षा विशेषज्ञ मानते हैं कि यूक्रेन युद्ध के चलते रूस अपने सीमित उत्पादन का ज्यादातर हिस्सा फ्रंटलाइन पर भेज रहा है। ऐसे में तुर्की से वापस ली गई प्रणालियां भारत को जल्दी मिल सकती हैं।
भारत के लिए यह समझौता रणनीतिक रूप से अहम साबित हो सकता है, खासकर मई में पाकिस्तान से हुई झड़पों के बाद जब भारत ने एयर डिफेंस को प्राथमिकता दी है।
हालांकि, इस संभावित सौदे में कई अड़चनें भी हैं। अमेरिका और रूस दोनों ही इस तरह के लेन-देन को लेकर संवेदनशील हैं। डोनाल्ड ट्रंप के भारत-विरोधी रुख और रूस-नाटो के बीच बढ़ते तनाव को देखते हुए यह समझौता राजनीतिक रूप से जटिल हो सकता है।
फिलहाल सारी नजरें रूस, तुर्की और भारत के संभावित त्रिपक्षीय सहयोग पर टिकी हैं, जो एशिया में सामरिक संतुलन को एक नया मोड़ दे सकता है।

