नई दिल्ली (अशोक “अश्क”) बिहार के पूर्व मुख्यमंत्री और राष्ट्रीय जनता दल के नेता तेजस्वी यादव के खिलाफ दक्षिणी दिल्ली के गोविंदपुरी थाने में एक एफआईआर दर्ज की गई है। यह एफआईआर दिल्ली बीजेपी के उपाध्यक्ष के. एस. दुग्गल द्वारा दर्ज कराई गई है। उन्होंने आरोप लगाया है कि तेजस्वी यादव के निर्देश पर प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की तस्वीर के साथ एक आपत्तिजनक पोस्ट सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म “एक्स” पर शेयर की गई, जिससे जनता की भावनाएं आहत हुई हैं।

इस कार्रवाई के बाद आम आदमी पार्टी (AAP) ने भाजपा पर तीखा हमला बोला है। पार्टी के वरिष्ठ नेता और दिल्ली सरकार के मंत्री सौरभ भारद्वाज ने सोशल मीडिया पर प्रतिक्रिया देते हुए इसे “तानाशाही” करार दिया। उन्होंने एक्स पर ट्वीट करते हुए लिखा, “ये डिक्टेटरशिप ही तो है। उस दिल्ली में जहां डॉक्टर और पार्षद पर हमले के बावजूद एफआईआर नहीं होती, वहां दूसरे राज्य के नेता तेजस्वी यादव पर तुरंत एफआईआर दर्ज हो जाती है। ये क्या मजाक है?”
AAP ने हाल ही में आरोप लगाया था कि भाजपा से जुड़े एक विधायक ने दिल्ली के एक डॉक्टर के साथ मारपीट की थी, लेकिन उस मामले में एफआईआर दर्ज नहीं हुई। इसके अलावा, पार्टी ने यह भी आरोप लगाया कि एक घोषित तड़ीपार ने AAP पार्षद पर हमला किया, फिर भी पुलिस ने कोई कानूनी कार्रवाई नहीं की। सौरभ भारद्वाज ने इन घटनाओं को लेकर कानून व्यवस्था पर गंभीर सवाल उठाए और कहा कि भाजपा नेताओं को बचाया जा रहा है, जबकि विपक्षी नेताओं के खिलाफ कार्रवाई में तेजी दिखाई जा रही है।
तेजस्वी यादव पर इससे पहले भी इस तरह के आरोपों को लेकर विभिन्न राज्यों में एफआईआर दर्ज हो चुकी है। उत्तर प्रदेश और महाराष्ट्र में भी इसी प्रकार के मामलों में उनके खिलाफ केस दर्ज किए गए थे। लेकिन अब राजधानी दिल्ली में एफआईआर दर्ज होने से मामला और ज्यादा राजनीतिक रंग लेता दिख रहा है।
राजनीतिक विश्लेषकों का मानना है कि यह मामला आने वाले चुनावों से पहले सियासी गर्मी को और बढ़ा सकता है। जहां एक ओर भाजपा इसे “अभद्र भाषा और पीएम के अपमान” का मामला बता रही है, वहीं विपक्ष इसे बदले की राजनीति और अभिव्यक्ति की आज़ादी पर हमला बता रहा है।
फिलहाल, तेजस्वी यादव या राजद की ओर से इस एफआईआर पर आधिकारिक प्रतिक्रिया नहीं आई है, लेकिन विपक्षी खेमे में इसे लेकर नाराजगी स्पष्ट दिख रही है।
इस बीच दिल्ली पुलिस पर भी पक्षपात के आरोप लगने लगे हैं, जिसे लेकर अब सोशल मीडिया से लेकर सड़कों तक बहस तेज होती जा रही है। सवाल यही है क्या कानून सबके लिए बराबर है या फिर राजनीति इसमें हस्तक्षेप कर रही है?

