
नई दिल्ली, 01 मार्च (निज संवाददाता) मध्य-पूर्व से आई एक सनसनीखेज खबर ने दुनिया को हिला दिया है। ईरान की राजधानी तेहरान में अमेरिका-इस्राइल के संयुक्त हमले में ईरान के सर्वोच्च नेता अयातुल्ला अली खामेनेई की मौत हो गई। शनिवार सुबह हुए इस हमले ने न सिर्फ ईरान की सत्ता संरचना को झकझोर दिया, बल्कि वैश्विक राजनीति में भी भूचाल ला दिया है। सूत्रों के मुताबिक, ओमान की मध्यस्थता में चल रही बातचीत विफल होने के बाद अमेरिका और इस्राइल ने संयुक्त कार्रवाई का फैसला किया। शुरुआती योजना के तहत हमला रात के अंधेरे में होना था, लेकिन ऐन वक्त पर मिली खुफिया जानकारी ने पूरी रणनीति बदल दी।

बताया जा रहा है कि CIA कई महीनों से खामेनेई की गतिविधियों और उनके मूवमेंट पैटर्न पर नजर रखे हुए थी। एजेंसी को शनिवार सुबह तेहरान के सबसे सुरक्षित सरकारी परिसर में शीर्ष नेतृत्व की एक अहम बैठक की ‘हाई फिडेलिटी’ सूचना मिली। इस बैठक में खामेनेई के साथ Islamic Revolutionary Guard Corps (IRGC) के प्रमुख, रक्षा मंत्री और सैन्य परिषद के अधिकारी मौजूद होने वाले थे।इस इनपुट को तुरंत इस्राइल के साथ साझा किया गया। इसके बाद रात की बजाय शनिवार सुबह हमले का फैसला लिया गया, ताकि एक ही वार में शीर्ष नेतृत्व को निशाना बनाया जा सके। रिपोर्ट्स के अनुसार, इस्राइली लड़ाकू विमानों ने खामेनेई के निवास वाले परिसर पर करीब 30 बम गिराए। कुछ ही मिनटों में पूरा परिसर मलबे में तब्दील हो गया।

86 वर्षीय खामेनेई 1989 से ईरान के सर्वोच्च नेता थे और अमेरिकी-इस्राइली विरोधी नीति के प्रतीक माने जाते थे। उनकी मौत के साथ ही ईरान की सत्ता में बड़ा शून्य पैदा हो गया है। अब सवाल यह है कि क्या यह हमला क्षेत्रीय युद्ध का संकेत है या मध्य-पूर्व की नई सियासी पटकथा की शुरुआत? दुनिया की नजरें अब तेहरान पर टिकी हैं।

