
पटना, 04 फरवरी (अविनाश कुमार) बिहार में जमीन से जुड़े मामलों में आम लोगों की सबसे बड़ी परेशानी दाखिल-खारिज की अनिश्चित देरी पर सरकार ने सख्त रुख अपनाया है। लंबे समय से अंचल कार्यालयों में मामला लंबित है जैसे जुमलों के सहारे फाइलें रोकी जाती थीं। इस स्थिति को खत्म करने के लिए राजस्व एवं भूमि सुधार विभाग ने नई गाइडलाइन जारी की है। अब केवल वास्तविक और प्रभावी न्यायिक आदेश की स्थिति में ही राजस्व कार्यवाही रुकेगी, अन्यथा प्रक्रिया निरंतर जारी रहेगी।

उपमुख्यमंत्री सह राजस्व एवं भूमि सुधार मंत्री विजय कुमार सिन्हा ने कहा कि प्रशासन का उद्देश्य नागरिकों को समयबद्ध पारदर्शी सेवा देना है। उन्होंने कहा कि शब्दों की अलग-अलग व्याख्या से मामले अटकते थे। प्रधान सचिव द्वारा सभी अंचल अधिकारियों को निर्देश दिए गए हैं। धारा छह बारह की व्याख्या अब स्पष्ट होगी। समीक्षा में देरी की पुष्टि हुई थी। सरकार ने सक्षम न्यायालय की सूची भी तय की है। दिवानी न्यायालय, उच्च न्यायालय और सर्वोच्च न्यायालय शामिल हैं। बिना स्थगनादेश प्रक्रिया नहीं रुकेगी। आवेदन या आपत्ति आधार नहीं बनेगी। वाद तभी लंबित माना जाएगा जब नोटिस जारी हो।

सरकार का दावा है कि इससे पारदर्शिता बढ़ेगी, फैसले तेज होंगे और वर्षों से अटकी फाइलें बाहर आएंगी। आम खरीदारों को राहत मिलेगी और मनमानी पर रोक लगेगी। प्रशासन अधिक जवाबदेह बनेगा तथा जनता का भरोसा मजबूत होगा।

