भूटान, 11 नवंबर (अशोक “अश्क”) प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने भूटान के दो दिवसीय दौरे के दौरान दिल्ली में हुई भयावह घटना पर गहरा दुख व्यक्त किया है। उन्होंने कहा कि वे “भारी मन से भूटान पहुंचे हैं” क्योंकि बीती शाम (10 नवंबर) को हुई इस त्रासदी ने पूरे देश को गहरे शोक और आघात में डाल दिया है। प्रधानमंत्री ने कहा कि यह घटना न केवल दिल्ली बल्कि पूरे भारत के हर नागरिक के लिए दर्दनाक है।

मोदी ने बताया कि वे रातभर जांच एजेंसियों से संपर्क में रहे और सभी आवश्यक निर्देश जारी करते रहे। उन्होंने कहा, “इस षड्यंत्र की जड़ तक पहुंचने के लिए भारत सरकार के सभी संसाधन झोंक दिए जाएंगे, और जो भी इसके पीछे है, उसे किसी भी सूरत में बख्शा नहीं जाएगा।” उन्होंने यह भी कहा कि इस घटना में जिन परिवारों ने अपने प्रियजन खोए हैं, “पूरा देश उनके दुख में सहभागी है।”
प्रधानमंत्री ने शोक संतप्त परिजनों के प्रति संवेदना व्यक्त की और घायलों के शीघ्र स्वस्थ होने की कामना की। उन्होंने कहा कि सुरक्षा और कानून प्रवर्तन एजेंसियों को पूरी स्वतंत्रता दी गई है कि वे निष्पक्ष, त्वरित और गहन जांच करें और दोषियों के खिलाफ कड़ी से कड़ी कार्रवाई सुनिश्चित करें।
भूटान में अपने संबोधन के दौरान प्रधानमंत्री मोदी ने कहा कि आज का दिन भूटान, वहां के राजपरिवार और विश्व शांति में विश्वास रखने वाले सभी लोगों के लिए अत्यंत महत्वपूर्ण है। उन्होंने कहा, “भारत और भूटान के बीच आध्यात्मिक, सांस्कृतिक और ऐतिहासिक संबंध सदियों पुराने हैं, जो दोनों देशों की साझा विरासत को दर्शाते हैं।”
उन्होंने इस दौरे को “भारत की दृढ़ प्रतिबद्धता और साझेदारी का प्रतीक” बताया। मोदी ने कहा कि भारत हमेशा भूटान के साथ खड़ा रहेगा और दोनों देशों के रिश्ते “समय के साथ और भी मजबूत होते रहेंगे।”
प्रधानमंत्री ने अपने वक्तव्य का समापन करते हुए कहा कि भारत दुख की इस घड़ी में भी मजबूती और एकजुटता से आगे बढ़ेगा।

