नई दिल्ली 3 सितम्बर (अशोक “अश्क”) दिल्ली नगर निगम ने दिल्ली सरकार को एक चिट्ठी भेजकर राजधानी की सीमाओं से टोल टैक्स वसूली बंद करने का सुझाव दिया है। इसके बदले में निगम ने सरकार से हर साल 900 करोड़ रुपये की आर्थिक मदद की मांग की है। अधिकारियों का कहना है कि इससे दिल्ली में ट्रैफिक जाम की समस्या कम की जा सकेगी।
नगर निगम ने इस संभावित राजस्व नुकसान की भरपाई के लिए दो विकल्प सुझाए हैं:

- हर साल 900 करोड़ रुपये का भुगतान, जिसमें 3-4% की महंगाई आधारित वार्षिक वृद्धि शामिल हो।
- अचल संपत्ति की खरीद-बिक्री पर ट्रांसफर ड्यूटी में 1% की बढ़ोतरी।
इस पत्र में जून में हुई उस बैठक का भी उल्लेख है जिसमें केंद्रीय मंत्री नितिन गडकरी ने टोल बूथ हटाने की आवश्यकता पर जोर दिया था। MCD अधिकारियों ने स्पष्ट किया कि टोल टैक्स MCD अधिनियम, 1957 की धारा 113(2) के तहत लिया जाता है, जबकि पर्यावरण मुआवजा शुल्क सुप्रीम कोर्ट के निर्देश पर वसूला जाता है।
दिल्ली में 156 टोल प्लाजा हैं, लेकिन 13 प्रमुख एंट्री पॉइंट से 85% ट्रैफिक आता है। गाजीपुर, रजोकरी, बदरपुर और कालिंदी कुंज जैसे टोल पॉइंट्स पर अक्सर लंबा ट्रैफिक जाम रहता है।
हालांकि, 2019 में RFID आधारित टोल भुगतान अनिवार्य कर दिया गया था, फिर भी ECC की वसूली और जांच के कारण मालवाहक वाहनों को रुकना पड़ता है। MCD अधिकारियों ने बताया कि खाली और जरूरी सामान ले जाने वाले वाहनों के लिए दरें अलग होने की वजह से जांच अनिवार्य है।
ECC प्रणाली में एकरूपता लाने के लिए सुप्रीम कोर्ट में याचिका भी दायर की गई है। अभी तक दिल्ली सरकार ने MCD के इस प्रस्ताव पर कोई आधिकारिक प्रतिक्रिया नहीं दी है।

