
पूर्णिया, 01 फरवरी (राजेश कुमार झा) सूरज फॉर जस्टिस को लेकर,जिस तरह लोगों में आक्रोश देखा जा रहा है.उससे कहीं न कहीं पुलिस की तफ्तीश पर भी सवालिया निशान उठ रहे है.पब्लिक कह रही है क्या अपराधी पुलिस से ज्यादा शातिर और ताकतवर है.क्या पुलिस के सारे तंत्र फेल हो गए है.दूसरी तरफ पुलिस इस हत्याकांड पर अभी कुछ भी कहने से परहेज कर रही है.

हालांकि पुलिस की कई एजेंसी इन हत्यारों की खोज बीन में दिन रात जुटी है.पुलिस हर कीमत में इन हत्यारों को बख्शने वाली नहीं है.पुलिस भी चाह रही है कि इस हत्याकांड का जल्द से जल्द उद्भेदन हो और पब्लिक में एक बेहतर मैसेज जाय. लेकिन 6 दिन बीतने के बावजूद भी अभी तक सूरज बिहारी का एक भी हत्यारों का नहीं पकड़ा जाना,पुलिस पर सवालिया निशान उठ रही है.दूसरी तरफ आमलोगों के मन में इस हत्या को लेकर कई तरह के सवाल उठ रहे है.

जिसका जवाब हत्यारों की गिरफ्तारी के बाद ही मिल पाएगी.बताते चलें कि आमलोगों के बीच इस तरह की चर्चा चल रही है कि हत्यारों को सूरज शर्मा से दुश्मनी थी तो हत्यारों ने सूरज बिहारी की हत्या क्यों की.जबकि दुश्मनी सूरज शर्मा और स्नेहिल झा के बीच थी तो सूरज बिहारी को क्यों टारगेट किया गया.क्यों उसकी गोली मारकर हत्या कर दी. आखिर ऐसी क्या वजह थी कि सिर्फ सूरज बिहारी को ही गोली मारी गई.जबकि लड़ाई सूरज शर्मा और स्नेहिल झा के बीच थी.ऐसे कई सवाल है,जिसका जवाब हत्यारे की गिरफ्तारी के बाद ही मिल सकती है.

