नई दिल्ली, 15 अक्तूबर (अशोक “अश्क”) भारतीय रेलवे की स्वदेशी तकनीक से बनी देश की पहली हाइड्रोजन ट्रेन अब चलने के लिए तैयार है। आठ बोगियों वाली यह आधुनिक ट्रेन दिल्ली के शकूरबस्ती यार्ड में खड़ी है, जबकि इसके लिए जींद में हाइड्रोजन प्लांट का निर्माण पूरा कर लिया गया है। परीक्षण की प्रक्रिया अंतिम चरण में है। दीपावली के बाद यह ट्रेन सोनीपत-गोहाना-जींद के बीच दौड़ना शुरू कर देगी।

रेल मंत्री अश्विनी वैष्णव पहले ही अपने एक्स (पूर्व ट्विटर) हैंडल से इस ट्रेन का वीडियो जारी कर इसकी विशेषताओं को साझा कर चुके हैं। यह ट्रेन भारतीय रेलवे के लिए मील का पत्थर साबित होगी क्योंकि इसमें न तो बिजली की जरूरत होगी और न ही डीजल जैसे परंपरागत ईंधन की।
प्रमुख विशेषताएं:
- रूट: सोनीपत-गोहाना-जींद (89 किमी)
- गति: 110 से 140 किमी प्रति घंटा
- यात्री क्षमता: 2,638
- बोगियां: 8
- **हाइड्रोजन उत्पादन: 430 किलो प्रतिदिन (जींद प्लांट)
- कुल लागत: 120 करोड़ रुपये
जींद में लगे प्लांट में रोजाना 430 किलो हाइड्रोजन तैयार की जाएगी, जो ट्रेन को संचालित करने के लिए प्रयुक्त होगी। प्लांट में तीन हजार किलो हाइड्रोजन भंडारण की क्षमता, अत्याधुनिक कंप्रेसर और प्री-कूलर युक्त दो डिस्पेंसर लगाए गए हैं, जिससे तेज़ी से ईंधन भरा जा सकेगा।
हाइड्रोजन फ्यूल सेल तकनीक पर आधारित यह ट्रेन डीजल ट्रेनों की तुलना में कहीं अधिक ऊर्जा-कुशल है। यह सिर्फ पानी और भाप उत्सर्जित करेगी, जिससे प्रदूषण बिल्कुल नहीं होगा। इसका 1200 हॉर्सपावर वाला इंजन विश्व की सबसे ताकतवर हाइड्रोजन ट्रेनों में गिना जाएगा।
यह ट्रेन विशेष रूप से पहाड़ी और हैरिटेज रूट्स पर कारगर सिद्ध होगी। कम शोर के साथ अधिक दूरी तय करने की क्षमता इसे पर्यावरण के अनुकूल और यात्री के लिए अधिक आरामदायक बनाती है।
हाइड्रोजन ट्रेन भारत की आत्मनिर्भर तकनीक का प्रतीक है और रेलवे के हरित भविष्य की दिशा में एक ऐतिहासिक कदम भी। यह पहल भारत को वैश्विक हरित परिवहन मानचित्र पर मजबूत स्थान दिलाने की ओर बढ़ रही है।

