
गोपालगंज,टीएन मिश्रा। जिले के सासामुसा चीनी मिल को पुनः चालू करने की कवायद शुरू हो गई। इसके शुरू होने से गन्ना बाहुल्य बिहार के सबसे बड़े प्रखंड के गन्ना किसानों में बड़ी उम्मीद जगी है।इससे औद्योगिक परिदृश्य को नई दिशा मिलने की प्रबल संभावना दिख रही है। शुक्रवार को बिहार सरकार के अपर मुख्य सचिव के. सेंथिल, निरानी ग्रुप के चेयरमैन मुर्गेश निरानी तथा गन्ना उद्योग विभाग के आयुक्त जय प्रकाश नारायण सिंह हेलीकॉप्टर से सासामुसा पहुंचे। तीनों अधिकारियों ने सासामुसा स्थित बंद पड़ी चीनी मिल का स्थलीय निरीक्षण किया और मिल परिसर की वर्तमान स्थिति का जायजा लिया। निरीक्षण के दौरान अधिकारियों ने मिल की मशीनरी, भूमि,संरचना और आसपास के गन्ना उत्पादन क्षेत्र की विस्तृत जानकारी ली। अधिकारियों ने स्थानीय किसानों और जनप्रतिनिधियों से भी संक्षिप्त बातचीत कर उनकी अपेक्षाओं को समझा। निरानी ग्रुप, जिसे देश में गन्ना आधारित उद्योगों के क्षेत्र में अग्रणी कंपनियों में गिना जाता है, यह भारत की दूसरी सबसे बड़ी गन्ना उत्पादक कंपनी मानी जाती है। इससे पहले समूह ने रीगा शुगर कंपनी लिमिटेड, सीतामढ़ी की रीगा मिल के संचालन में रुचि दिखाई थी। अब सासामुसा चीनी मिल को पुनः चालू करने की दिशा में समूह की सक्रियता को जिले के लिए सकारात्मक संकेत माना जा रहा है।निरीक्षण के बाद निरानी ग्रुप के चेयरमैन मुर्गेश निरानी ने कहा कि यदि सभी प्रक्रियाएं अनुकूल रहीं तो सासामुसा मिल को आधुनिक तकनीक के साथ पुनर्जीवित किया जा सकता है। उन्होंने बताया कि केवल चीनी उत्पादन ही नहीं, बल्कि गन्ने से बनने वाले इथेनॉल, बायो-फर्टिलाइजर,बिजली उत्पादन तथा अन्य बायो-प्रोडक्ट्स के माध्यम से किसानों को अतिरिक्त लाभ दिलाने की योजना बनेंगी। इससे क्षेत्र में रोजगार के अवसर भी सृजित होंगे। अपर मुख्य सचिव श्री सेंथिल ने कहा कि राज्य सरकार बंद पड़ी चीनी मिलों को पुनर्जीवित करने के लिए गंभीर है और निवेशकों को हर संभव सहयोग प्रदान किया जाएगा। उन्होंने संकेत दिया कि यदि परियोजना पर सहमति बनती है तो यह जिले के औद्योगिक विकास में मील का पत्थर साबित हो सकता है। सासामुसा चीनी मिल वर्षों से बंद पड़ी है, जिससे क्षेत्र के हजारों गन्ना किसानों को अपना गन्ना दूर-दराज की मिलों तक भेजनी पड़ती है। मिल के पुनःसंचालन से न केवल किसानों की परिवहन लागत कम होगी,बल्कि स्थानीय स्तर पर आर्थिक गतिविधियां भी तेज होंगी।जिलेवासियों और किसानों को अब इस पहल से ठोस निर्णय की उम्मीद है, जो गोपालगंज को एक बार फिर चीनी उद्योग के मानचित्र पर बढिया से स्थापित कर सकता है।

