
पूर्णिया, 24 जनवरी(राजेश कुमार झा) एक समय था कि पूर्णिया महिला कॉलेज में पढ़ने वाली छात्राएं का मनोबल बहुत ऊंचा हुआ करता था.कारण उस समय पूर्णिया महिला कॉलेज को कोसी-सीमांचल की शान कहा जाता था.कारण पूर्णिया महिला कॉलेज में किसी भी छात्रा का एडमिशन होना बड़ा गर्व माना जाता था.कोसी और सीमांचल की लड़कियां महिला कॉलेज की हॉस्टल में रहकर पढ़ाई करती थी.

अभिभावक भी बड़े शान और गर्व से कहते थे कि मेरी बेटी पूर्णिया के महिला कॉलेज में पढ़ती है.उस समय पूर्णिया महिला कॉलेज की प्रिंसिपल इंदु बाला सिंह हुआ करती थी. जिन्हें कॉलेज में पढ़ने वाली लड़कियां बहुत ही डिसिप्लिन और कड़क मिजाज कहती थीं.मजाल किया था कि इंदु बाला सिंह के समय कोई भी लड़किया कैंपस के बाहर चली जाय.यहां तक कि हॉस्टल में रह रही लड़कियों के अभिभावक भी बिना प्रिंसिपल के इजाजत के बगैर नहीं मिल सकते थे.ये रुतबा था पूर्णिया महिला कॉलेज का.लेकिन पता नहीं इस महिला कॉलेज को किसकी नजर लग गई.जिस महिला कॉलेज की हॉस्टल तकरीबन 150 छात्राएं रहती थी.

जहां सीट के लिए बड़ी-बड़ी पैरवी लगती थी.तब जाकर हॉस्टल अलॉट होता था.उसकी ऐसी दशा की आज अभिभावक अपने बेटियों को पूर्णिया महिला कॉलेज की हॉस्टल में भेजना भी नहीं चाहते है. कारण महिला कॉलेज की बाउंड्री वाल के टूटने से असामाजिक तत्वों का अड्डा बन गया था.आए दिन कुछ न कुछ शिकायतें मिलती ही रहती थी.लेकिन बाउंड्री वाल के बन जाने के बाद हॉस्टल में रह रही छात्राएं और उनके माता-पिता ने बिफोरप्रिंट डिजिटल मीडिया से बातचीत में बताया कि अब हमलोगों को काफी राहत महसूस हुई. अब हमलोग काफी सुरक्षित महसूस कर रहे है.एक छात्रा ने तो यहां तक कह दिया कि मेरे पिताजी ने कहा घर में रहकर पढ़ो.लेकिन अब कहते है कि चाहो तो हॉस्टल जाकर पढ़ाई कर सकती हो.अब बाउंड्री वाल होने से तुमलोगों का हॉस्टल काफी सुरक्षित हो गया है.

