नई दिल्ली, 15 नवम्बर (अशोक “अश्क”) एनडीए की प्रचंड जीत के बाद बिहार के मुख्यमंत्री नीतीश कुमार 10वीं बार शपथ लेने की तैयारी में हैं। 74 वर्षीय नीतीश कुमार अब तक नौ बार मुख्यमंत्री पद की शपथ ले चुके हैं और आगामी कार्यकाल के दौरान वे अपने कुल कार्यकाल में कई रिकॉर्ड तोड़ सकते हैं। बिहार में उनकी राजनीतिक पकड़ और अनुभव उन्हें राज्य के सबसे लंबे समय तक सत्ता में बने रहने वाले नेताओं में शामिल करता है।

नीतीश कुमार का पहला कार्यकाल मार्च 2000 में शुरू हुआ, लेकिन बहुमत साबित न कर पाने के कारण वह केवल सात दिन तक मुख्यमंत्री रहे। दूसरा कार्यकाल नवंबर 2005 में शुरू हुआ, जब उन्होंने पूर्ण कार्यकाल निभाया। तीसरी बार उन्होंने नवंबर 2010 में शपथ ली। चौथा कार्यकाल 2014 में आया, जब लोकसभा चुनाव में पार्टी के खराब प्रदर्शन के बाद उन्होंने इस्तीफा दिया, और जीतन राम मांझी मुख्यमंत्री बने। फरवरी 2015 में वे पुनः मुख्यमंत्री बने।
पांचवां कार्यकाल नवंबर 2015 में महागठबंधन के तहत आया, जबकि छठे कार्यकाल में जुलाई 2017 में उन्होंने एनडीए में वापसी की। सातवां कार्यकाल नवंबर 2020 के विधानसभा चुनाव के बाद शुरू हुआ। आठवां कार्यकाल अगस्त 2022 में महागठबंधन के साथ रहा। जनवरी 2024 में नौवीं बार शपथ लेने के बाद वे एनडीए में वापस आए।
नीतीश कुमार का राजनीतिक सफर राज्य में स्थिरता और अनुभव का प्रतीक माना जाता है। उनकी अगली शपथ के साथ ही वे बिहार के सबसे लंबे कार्यकाल वाले मुख्यमंत्री बनने की दिशा में अग्रसर होंगे। वर्तमान में बिहार में सत्ता समीकरण और गठबंधन की स्थिति उन्हें आगामी पांच वर्षों तक मजबूत शासन देने का अवसर प्रदान करती है।
राजनीतिक विश्लेषकों का कहना है कि 10वीं बार शपथ लेने के बाद नीतीश कुमार का रिकॉर्ड सिक्किम के पूर्व मुख्यमंत्री पवन कुमार चामलिंग को चुनौती देगा, जो लंबे समय तक मुख्यमंत्री रहे। उनके नेतृत्व में बिहार का प्रशासनिक अनुभव और राजनीतिक स्थिरता दोनों मजबूत होंगे।
कुल मिलाकर, नीतीश कुमार का यह 10वां कार्यकाल न केवल उनके राजनीतिक करियर की उपलब्धि है, बल्कि बिहार की राजनीति में एक नए अध्याय की शुरुआत भी मानी जा रही है।

