नई दिल्ली, 16 सितम्बर (अशोक “अश्क”) नेपाल एक बार फिर शांति और प्रगति के रास्ते पर लौटता दिखाई दे रहा है। भ्रष्टाचार और इंटरनेट मीडिया पर प्रतिबंध के खिलाफ जेन-जी के नेतृत्व में भड़के हिंसक विरोध प्रदर्शनों और इसके परिणामस्वरूप केपी शर्मा ओली सरकार के इस्तीफे के बाद, देश में अंतरिम सरकार का गठन कर लिया गया है। देश की पहली महिला प्रधानमंत्री सुशीला कार्की के नेतृत्व में बनी इस सरकार ने सोमवार को कार्यभार संभाल लिया।

राष्ट्रपति रामचंद्र पौडेल ने शीतल निवास में आयोजित एक सादे समारोह में तीन नए मंत्रियों को शपथ दिलाई। समारोह टेंट में आयोजित हुआ क्योंकि हाल की हिंसा में राष्ट्रपति भवन क्षतिग्रस्त हो गया था। नए मंत्रियों के चयन में अनुभव को प्राथमिकता दी गई है। मानवाधिकार वकील ओम प्रकाश आर्याल को गृह मंत्रालय और विधि, न्याय एवं संसदीय कार्य मंत्रालय की जिम्मेदारी दी गई है। पूर्व वित्त सचिव रमेश्वर खनाल को वित्त मंत्रालय सौंपा गया है, जबकि नेपाल विद्युत प्राधिकरण के पूर्व सीईओ कुलमान घिसिंग को ऊर्जा, जल संसाधन, सिंचाई, परिवहन और शहरी विकास मंत्रालय का प्रभार दिया गया है।
प्रधानमंत्री बनने के बाद सुशीला कार्की ने कहा कि अंतरिम सरकार का उद्देश्य स्वतंत्र और निष्पक्ष चुनाव कराना है। गृह मंत्री आर्याल ने प्रदर्शनकारियों के खिलाफ अत्यधिक बल प्रयोग की जांच कराने का वादा किया है।
जेन-जी आंदोलन के दौरान मारे गए लोगों को श्रद्धांजलि देते हुए सरकार ने 17 सितंबर को राष्ट्रीय शोक दिवस घोषित किया है। उस दिन सभी सरकारी कार्यालय बंद रहेंगे और राष्ट्रीय ध्वज आधा झुका रहेगा। हिंसक प्रदर्शनों में 59 प्रदर्शनकारी, 10 कैदी और तीन पुलिसकर्मी मारे गए थे। सरकार ने मृतकों के परिवारों को 15 लाख नेपाली रुपये का मुआवजा देने की घोषणा की है, जिसमें 10 लाख मृत्यु मुआवजा और 5 लाख अन्य खर्चों के लिए दिए जाएंगे। साथ ही, मारे गए लोगों को “बलिदानी” का दर्जा देने का फैसला लिया गया है।
सोमवार को हुई कैबिनेट बैठक में एक उच्च स्तरीय न्यायिक जांच आयोग के गठन का निर्णय भी लिया गया, जो हिंसा के दौरान हुई घटनाओं की जांच करेगा।
इस पूरे आंदोलन में “हामी नेपाल” नामक संगठन और उसके संस्थापक सुदान गुरुंग की भूमिका अहम रही। उन्होंने प्रतिबंधित इंटरनेट मीडिया प्लेटफॉर्म तक पहुंच के लिए वीपीएन और डिस्कार्ड जैसे एप्स का इस्तेमाल कर हजारों युवाओं को संगठित किया। इसी डिजिटल रणनीति के कारण सरकार को झुकना पड़ा। सुदान और उनकी टीम ने प्रधानमंत्री के चयन में भी अहम भूमिका निभाई, हालांकि उन्होंने कैबिनेट में पद लेने से इनकार कर दिया है। उनका कहना है कि वे भविष्य में नीतिगत फैसलों का हिस्सा बनना चाहते हैं।
भ्रष्टाचार के खिलाफ सख्त रुख रखने वाली सुशीला कार्की की अगुवाई में नेपाल अब एक नए युग में प्रवेश कर रहा है, जहां युवा, पारदर्शिता और लोकतंत्र को प्राथमिकता दी जा रही है।

