नई दिल्ली, 11 अक्तूबर (अशोक “अश्क”) नोबेल शांति पुरस्कार 2025 के लिए वेनेजुएला की विपक्षी नेता मारिया कोरिना मचाडो को चुना गया है। जहां दुनियाभर से उन्हें बधाइयां मिल रही हैं, वहीं कई संगठनों और राजनीतिक हस्तियों ने इस फैसले की तीखी आलोचना की है।
मचाडो को यह पुरस्कार वेनेजुएला में लोकतंत्र बहाल करने के लिए किए गए उनके अहिंसक संघर्ष के लिए दिया गया है। हालांकि, उनकी अमेरिकी दक्षिणपंथी नेताओं से नजदीकी और इजरायल समर्थक रुख को लेकर विवाद खड़ा हो गया है।

व्हाइट हाउस, CAIR (काउंसिल ऑन अमेरिकन इस्लामिक रिलेशन) और वेनेजुएला की सत्ताधारी पार्टी के नेताओं ने मचाडो को नोबेल देने पर नाराजगी जताई है। CAIR ने मचाडो पर मुस्लिम विरोधी अजेंडे का समर्थन करने का आरोप लगाया और नोबेल कमेटी से पुरस्कार वापस लेने की मांग की।
सरकार के पूर्व वाइस प्रेसिडेंट पाबले इगलेसियास ने मचाडो पर तख्तापलट की कोशिश और हिटलर की विचारधारा का समर्थन करने का आरोप लगाया। उन्होंने कटाक्ष किया कि “अब अगर पुतिन और जेलेंस्की को भी नोबेल मिल जाए तो आश्चर्य नहीं होगा।”
नोबेल कमेटी ने अपने फैसले को सही ठहराते हुए कहा कि मचाडो ने वेनेजुएला को शांति के रास्ते पर लाने के लिए अथक प्रयास किए हैं। वहीं, मचाडो ने पुरस्कार को अमेरिका के पूर्व राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप को समर्पित कर एक और राजनीतिक बहस को जन्म दे दिया है।

