पटना, 03 दिसम्बर (सेंट्रल डेस्क) एडवोकेट्स डे और देश के प्रथम राष्ट्रपति डॉ. राजेंद्र प्रसाद की जयंती के अवसर पर ब्रिटिश लिंगुआ ने बुधवार को बोरिंग रोड क्रॉसिंग स्थित अपने परिसर में “न्यायपूर्ण समाज के निर्माण में वकीलों की भूमिका” विषय पर सेमिनार आयोजित किया।

कार्यक्रम के मुख्य अतिथि प्रख्यात लेखक, सामाजिक सुधारक एवं ब्रिटिश लिंगुआ के प्रबंध निदेशक डॉ. बीरबल झा थे।समाज में न्याय और नैतिकता के महत्व को रेखांकित करते हुए डॉ. झा ने कहा कि किसी भी देश की असली ताकत उसकी आर्थिक सामर्थ्य में नहीं, बल्कि न्याय और समानता के प्रति उसकी निष्ठा में निहित होती है। उन्होंने कहा,“अधिवक्ता अधिकारों के संरक्षक हैं। वे न सिर्फ अदालत की आवाज़ हैं, बल्कि न्याय के मशालची हैं, जिनका प्रभाव कानूनी दायरों से बहुत आगे तक जाता है।

”अधिवक्ता—लोकतंत्र के प्रहरीडॉ. झा ने अधिवक्ताओं को भारतीय लोकतंत्र का सुदृढ़ स्तंभ बताते हुए कहा,“अधिकार इसलिए जीवित रहते हैं, लोकतंत्र इसलिए फलता-फूलता है, क्योंकि अधिवक्ता सतर्क खड़े रहते हैं। सत्य के लिए लड़ने वाला वकील राष्ट्र की नैतिक रीढ़ को मजबूत करता है।”उन्होंने विधि समुदाय से आह्वान किया कि वे अन्याय के विरुद्ध निर्भीक होकर खड़े हों और लोकतांत्रिक संस्थाओं को सशक्त बनाने में सक्रिय भूमिका निभाएँ।ईमानदारी को बताया वकालत की सबसे बड़ी पूंजीपेशेवर नैतिकता को सर्वोपरि मानते हुए उन्होंने कहा,“ज्ञान से वकील सक्षम बनता है, लेकिन महान वही होता है जिसकी ईमानदारी अडिग हो। न्याय की राह में वकील की ईमानदारी ही राष्ट्र की असली शक्ति है।”डॉ. झा ने नागरिकों में कानूनी साक्षरता बढ़ाने पर भी ज़ोर दिया। उन्होंने कहा कि कानूनी रूप से जागरूक नागरिक समाज को आत्मविश्वासी बनाते हैं और वकील इस जागरूकता के सेतु होते हैं।डॉ. राजेंद्र प्रसाद को श्रद्धांजलिसेमिनार में उपस्थित अतिथियों ने देशरत्न डॉ. राजेंद्र प्रसाद को नमन किया। डॉ. झा ने कहा,“डॉ. राजेंद्र प्रसाद को स्मरण करना केवल एक नेता को याद करना नहीं, बल्कि उन आदर्शों—न्याय, निष्पक्षता और लोकतांत्रिक जिम्मेदारी—को दोहराना है जिन पर उन्होंने जीवन बिताया।”अधिवक्ताओं के योगदान की सराहनाअपने संबोधन के समापन में डॉ. झा ने कहा कि “एक वकील की सराहना करना दरअसल न्याय की सराहना करना है। अधिवक्ता ही न्यायपूर्ण और प्रगतिशील समाज की आधारशिला को मजबूत करते हैं।”

