नई दिल्ली, 3 सितम्बर (अशोक “अश्क”) उत्तर भारत में लगातार हो रही भारी बारिश के चलते पंजाब की नदियों का जलस्तर तेजी से बढ़ रहा है। सतलुज, ब्यास और रावी जैसी प्रमुख नदियां उफान पर हैं, जिससे निचले इलाकों में बाढ़ का गंभीर खतरा मंडरा रहा है। इस स्थिति के मद्देनज़र भारत ने पाकिस्तान को सतलुज नदी में संभावित बाढ़ को लेकर मानवीय आधार पर चेतावनी जारी की है।

सूत्रों के अनुसार, यह चेतावनी मंगलवार को विदेश मंत्रालय के माध्यम से पाकिस्तान को भेजी गई है, जिसमें बुधवार को सतलुज नदी में बाढ़ की उच्च संभावना जताई गई है। इससे पहले, भारत ने पिछले सप्ताह भी रावी नदी को लेकर पाकिस्तान को तीन बार अलर्ट जारी किया था।
भारी बारिश के कारण पंजाब के प्रमुख बांधों के जलाशय भर चुके हैं, जिसके चलते अतिरिक्त पानी छोड़ना पड़ा। इससे नदियों का प्रवाह और तेज हो गया है और सीमावर्ती क्षेत्रों में बाढ़ का खतरा और बढ़ गया है।
गौरतलब है कि भारत ने सिंधु जल संधि के तहत पाकिस्तान के साथ जल संबंधी आंकड़ों का आदान-प्रदान 22 अप्रैल 2025 को पहलगाम आतंकी हमले के बाद निलंबित कर दिया था। उस हमले में 26 लोगों की मौत हुई थी, जिनमें अधिकांश पर्यटक शामिल थे।
हालांकि, सूत्रों का कहना है कि मौजूदा चेतावनी राजनीतिक या कूटनीतिक संबंधों से इतर, मानवीय दृष्टिकोण से जारी की गई है ताकि पाकिस्तान को संभावित जन-धन हानि से बचाया जा सके।
भारत और पाकिस्तान के बीच सतलुज और तवी जैसी नदियां सिंधु जल संधि का हिस्सा हैं। सामान्यतः भारत बाढ़ के मौसम में पाकिस्तान को जल स्तर और प्रवाह की जानकारी साझा करता रहा है, लेकिन इस वर्ष परिस्थितियां बदली हुई हैं।
विशेषज्ञों का मानना है कि जलवायु परिवर्तन, अनियमित मानसून और बांधों की सीमित क्षमता के चलते क्षेत्र में बाढ़ की स्थिति और गंभीर हो सकती है। ऐसे में पारस्परिक सहयोग और चेतावनी प्रणाली दोनों देशों के लिए अत्यंत आवश्यक हो जाते हैं।

