पटना, 01 दिसम्बर (पटना डेस्क) राजधानी पटना का 39 हार्डिंग रोड स्थित सरकारी आवास इन दिनों सियासी हलकों में गर्म चर्चा का विषय बना हुआ है। पूर्व मुख्यमंत्री राबड़ी देवी को यह आवास आवंटित किए जाने के बाद से इसे लेकर तरह-तरह की अटकलें उभर आई हैं। लालू परिवार इस बंगले में शिफ्ट होने से परहेज़ कर रहा है, और राजनीतिक गलियारों में यह दावा तैर रहा है कि इस बंगले में जो भी नेता रह चुका है, उसका राजनीतिक सितारा डूब गया। इसी ‘अनलकी बंगले’ की बदनामी ने पूरे राज्य की राजनीति में सनसनी फैला दी है।

39 हार्डिंग रोड का यह दोमंजिला विशाल आवास बीजेपी, आरजेडी और कांग्रेस तीनों दलों के कई दिग्गज नेताओं की राजनीतिक गिरावट का साक्षी रहा है। आरजेडी के पूर्व मंत्री भूपेंद्र प्रसाद वर्मा और शमीम अहमद यहां रहे, पर दोबारा मंत्री पद तक न पहुँच सके। बीजेपी के चंद्र मोहन राय, विनोद नारायण झा और रामसूरत राय भी इसी बंगले में रहे, और तीनों ही का राजनीतिक कद बाद में लगातार घटता गया। रामसूरत राय को तो इस बार टिकट तक नहीं मिला, जबकि कभी सीनियर माने जाने वाले चंद्र मोहन राय अब राजनीतिक हाशिए पर सिमट गए हैं।
कांग्रेस के पूर्व मंत्री और प्रदेश अध्यक्ष रहे मदन मोहन झा को जब यह आवास मिला, तभी महागठबंधन सरकार गिर गई और वे दोबारा अध्यक्ष भी नहीं बन पाए। इन घटनाओं की लड़ी ने इस बंगले को “मनहूस आवास” या “अनलकी बंगला” बना दिया है।
राबड़ी देवी को यह आवास उनके 10 सर्कुलर रोड स्थित मौजूदा आवास के स्थान पर दिया गया है। लगभग डेढ़ किलोमीटर की दूरी पर स्थित इस बंगले में नीचे और ऊपर तीन-तीन कमरे, बड़ा कार्पेट एरिया और विशाल बगीचा है। सुविधाओं के लिहाज से यह बंगला काफी बेहतर है, लेकिन राजनीतिक साये ने लालू परिवार को नए ठिकाने पर कदम रखने से पहले सोचने पर मजबूर कर दिया है।
राजनीति में विश्वास और अंधविश्वास की यह टकराहट इस समय पटना की सबसे बड़ी सियासी कहानी बन चुकी है।

